देख शची नन्दन, जगत जीबन धन, अनुखण प्रेम धन
शची-नन्दन को देखो! वे सारे संसार के जीवन और धन हैं। वे हर क्षण संसार के लोगों से विनती करते हैं कि वे प्रेम का महान् धन स्वीकार करें। वे प्रेम में विभोर हैं। उनके गौर शरीर के रोम खड़े हैं। बार-बार 'हरि!' बोलते हुए गौर प्रभु नाचते हैं।
सभी अवतारों में गौर अवतार सबसे श्रेष्ठ हैं। उनका अनुपम रूप स्वर्ण को भी लजा देता है। उनके अरुण नेत्रों से प्रेम की धारा आँसुओं के रूप में बहती है।
वृन्दावन की महिमा सुनकर ब्राह्मणों के रत्न गौर धरती पर लोटने लगते हैं। मेरे प्रभु प्रेम में विभोर होकर हँसते हैं। काशीश्वर, अभिराम और पुरुषोत्तम पण्डित उनके पास रहते हैं। इस प्रकार नरहरि दास उनकी महिमा गाते हैं।