Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
एओ तो' एक कलिर् चेला माथा नेडा कप्नि परा, तिलक् नाके, गलाय् माला
अर्थ

यह भी तो कलियुग का एक और चेला है। वह सिर मुँड़ाए, लंगोटी बाँधे, नाक पर तिलक और गले में माला धारण करता है।

देख्ते वैष्णवेर् मत, आसलो शाक्त काजेर् बेला सहज-भजन् कोर्छेन मामु, सङ्गे लो'ये परेर् बाला
अर्थ

देखने में वह वैष्णव जैसा लगता है, परन्तु वास्तव में उसका आचरण शाक्त का है, जो भौतिक शक्ति की उपासना उसके भोग के लिए करता है। वह सहज-भजन के नाम पर दूसरों के बच्चों का 'मामा' बनकर उन्हीं की बेटियों के साथ चोरी-छिपे संग करता है।

सखी-भावे भज्छेन ता'रे, निजे हो'ये नन्द-लाला कृष्ण-दासेर् कथार् छले महा-जनके दिच्छेन शला
अर्थ

इन युवतियों को सखी मानकर वह स्वयं को नंद-लाल समझने लगता है। सभी को कृष्ण-दास बनने का उपदेश देने की आड़ में वह वास्तव में अपने को ही 'कृष्ण' बना बैठता है, और इस छलपूर्ण उपदेश से यह कलियुग का चेला भगवान के सच्चे भक्तों पर मानो तीखा भाला चला देता है।

नव-रसिक आपने मानि' खाच्छेन आबार् मन-कोला बाउल् बोले दोहाइ, ओ भाइ, दूर कोरो ए लीला-खेला
अर्थ

नव-रसिक होने का बनावटी दावा करते हुए वह अपनी ही मन की उपज के केले खाकर मौज मनाता है। चाँद बाउल कहते हैं, हे मेरे प्रिय भाइयों! भगवान की लीलाओं की इस झूठी नकल से दूर रहो।