Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

घरे बोसे' बाउल् हओ रे मन

घरे बोसे' बाउल् हओ रे मन, केनो कोर्बि दुष्ट आचरण
अर्थ

हे मेरे मन! घर में रहते हुए ही सच्चा बाउल बन जा। दुष्ट कर्मों में क्यों लगा रहता है?

मने मने राख्बि बाउल्-भाव, सङ्ग छाडि' धर्म-भावे कोर्बि विषय लाभ जीवन जापन कोर्बि, हरि-नामानन्दे सर्व-क्षण
अर्थ

तू मन के भीतर बाउल का भाव रख सकता है, और अनुचित संग त्यागकर धर्म के अनुसार स्वाभाविक रूप से सुख प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार तू हर क्षण हरिनाम के आनंद का अनुभव करते हुए अपना जीवन बिताएगा।

जत-दिन हृदोय्-शोधन नोय्, घर छाड्ले परे 'मर्कट-वैरागी' ता'रे कोय् हृदोय्-दोषे रिपुर् बोशे, पदे पदे ता'र् पतन
अर्थ

जो हृदय शुद्ध हुए बिना घर त्याग देता है, वह मर्कट-वैरागी अर्थात् बंदर जैसा त्यागी कहलाता है। हृदय में अपराधों से भरा हुआ और शत्रुओं के वश में पड़ा हुआ मनुष्य पग-पग पर और नीचे गिरता जाता है।

एँचडे-पाका वैरागी जे होय्, परेर् नारी लो'ये पालेर् गोदा हो'ये रोय् (आबार्) अर्थ-लोभे द्वारे द्वारे कोरे नीचेर् आराधन
अर्थ

त्याग में अपरिपक्व त्यागी वह है जो दूसरों की पत्नियों को छलता है और मोटे बंदर की तरह मादा बंदरों के झुंड पर स्वामित्व जताता है। इसके अलावा, ऐसा व्यक्ति धन के लोभ में द्वार-द्वार भटकता है। इस प्रकार वह पतित और गिरे हुए लोगों की भी झूठी पूजा करता रहता है।

घरे बोसे' पाकाओ निजेर् मन, आर् सकल-दिन कोरो हरिर् नाम्-सङ्कीर्तन तबे चाँद् बाउलेर् सङ्गे शेषे कोर्बि संसार विसर्जन
अर्थ

घर में रहते हुए ही अपने मन को परिपक्व बना। और प्रतिदिन हरिनाम-संकीर्तन करता रह। तब चाँद बाउल के संग में तू संसार का पूर्ण रूप से त्याग कर सकेगा।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
बाउल संगीत
पद
5