Nandgram Dham
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जय जय श्री कृष्ण चैतन्य नित्यानन्द

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Audio courtesy of ISKCON Desire Tree. All glories to the devotee singers.

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जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द जयाद्वैतचन्द्र जय गौर-भक्त-वृन्द
अर्थ

हे श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु, आपकी जय हो। हे नित्यानन्द प्रभु, आपकी जय हो। हे अद्वैतचन्द्र भगवान, आपकी जय हो। हे गौरांग भगवान के भक्तों, आप सबकी जय हो।

कृपा करि सबे मेलि करह करुणा अधम पतित-जने ना करिह घृण
अर्थ

मैं आप सभी से विनती करता हूँ कि मुझ पर कृपा करें। आपकी शरण में आए इस अत्यन्त पतित व्यक्ति को कृपया तुच्छ न समझें और अस्वीकार न करें।

ए तिन-संसार-माझे तुया पद सार भाविया देखिनू मने-गति नाहि आर
अर्थ

इस संसार में आपके चरण-कमल ही सबसे बड़ी सम्पत्ति हैं। मैं सदा अपने मन में आपके चरण-कमलों का ही दर्शन करता हूँ। मेरा कोई अन्य लक्ष्य नहीं है।

से पद पाबार आशे खेद उठे मने ब्याकूल हृदय सदा करिये क्रन्दने
अर्थ

मुझे आशा है कि किसी दिन मैं आपके चरण-कमलों को प्राप्त करूँगा, और यही आशा मेरे मन में गहरी पीड़ा उत्पन्न करती है। मेरा हृदय दुःख से भरा रहता है और मैं निरन्तर रोता रहता हूँ।

कि-रूपे पाइब किछु ना पाइ सन्धान प्रभु-लोकनाथ पद नाहिक स्मरण
अर्थ

मुझे नहीं सूझता कि मैं आपके चरण-कमलों को कैसे प्राप्त कर पाऊँगा। मुझे यह भी नहीं सूझता कि मैं अपने गुरुदेव लोकनाथ गोस्वामी के चरण-कमलों का सदा स्मरण कैसे रख पाऊँगा।

तूमि त दयालु प्रभु! चाह एक बार नरोत्तम हृदयेर घुचा-ओ अन्धकार
अर्थ

हे प्रभु, यदि आप मुझ पर तनिक भी दया करते हैं, तो कृपया एक बार मेरी ओर दृष्टि डालिए। कृपया नरोत्तम दास के हृदय का अंधकार दूर कीजिए।