कबे गौर बने
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5 रिकॉर्डिंगकब मैं नवद्वीप में स्वर्ग-गंगा के तट पर, लता-वृक्षों की छाया में रोते हुए यहाँ-वहाँ भटकूँगा? मैं 'हा राधे! हा कृष्ण!' पुकारते हुए इस शरीर के तथाकथित सुखों को पूरी तरह भूल जाऊँगा।
कब मैं चाण्डालों के घरों से भीख माँगकर भोजन करूँगा? मैं सरस्वती नदी का जल पीऊँगा, और नदी के दोनों तटों पर 'कृष्ण! कृष्ण!' का कोलाहल करते हुए आनन्द में लोट-पोट होऊँगा।
कब मैं धाम के निवासियों को प्रणाम करके उनकी कृपा की एक बूँद के लिए विनती करूँगा? मैं वैष्णवों के चरणों की रज अपने शरीर पर लगाकर अवधूत का वेश धारण कर घूमूँगा।
कब मैं गौड़-मण्डल और व्रज-मण्डल में कोई भेद नहीं देखूँगा? उस समय मैं व्रजवासी बन जाऊँगा। तब धाम का वास्तविक स्वरूप मेरी आँखों के सामने प्रकट होगा, और मैं श्रीमती राधारानी की दासी बन जाऊँगा।
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।