Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
महा-भुज नाचत चैतन्य राय के जाने कत कत भब शत शत सोणार बरण गोर राय
अर्थ

लम्बी, सुन्दर भुजाओं वाले चैतन्य राय नाचते हैं। वे कितने सौ-सौ भाव अनुभव करते हैं, यह कौन जान सकता है? गौर राय सोने के समान दमकते हैं।

प्रेमे ढर ढर अङ्ग निरमल पुलक अङ्कुर-शोभा आर कि कहिब अशेष अनुभब हेर-इते जग-मन लोभा
अर्थ

वे प्रेम के आँसू बहाते हैं। उनके अंग शोभामय हैं। उनके शरीर के रोम घास के नये अंकुरों की तरह खड़े होकर शोभा पाते हैं। और क्या कहूँ? संसार के लोग उन्हें देखते ही समझ जाते हैं, और उनके मन उनका संग पाने को ललचा उठते हैं।

शुनिया निज गुण नाम कीर्तन बिभोर नटन बिभङ्ग नदीया-पुर लोक पाशरिल दुःख सुख भासल प्रेम-तरङ्ग
अर्थ

अपनी ही महिमा और अपने ही नामों का कीर्तन सुनकर वे भाव-विभोर होकर नाचते हैं। नदिया के लोग अपने सुख-दुःख भूलकर प्रेम की तरंगों में तैरने लगते हैं।

रतन बितरण प्रेम-रस बरिखण अखिल भुबन सिञ्चित चैतन्य दास गाने अतुल प्रेम-दाने मुञि से ह-इलुं बञ्चित
अर्थ

वे प्रेम के रत्न खुले हाथों बाँटते हैं। वे प्रेम-रस की भारी वर्षा से सभी लोकों को सींच देते हैं। चैतन्य दास गाते हैं, वे प्रेम का अनुपम दान देते हैं। केवल मुझे ही वह दान नहीं मिला। केवल मैं ही वंचित रह गया।