महा भुज नाचत चैतन्य राय
लम्बी, सुन्दर भुजाओं वाले चैतन्य राय नाचते हैं। वे कितने सौ-सौ भाव अनुभव करते हैं, यह कौन जान सकता है? गौर राय सोने के समान दमकते हैं।
वे प्रेम के आँसू बहाते हैं। उनके अंग शोभामय हैं। उनके शरीर के रोम घास के नये अंकुरों की तरह खड़े होकर शोभा पाते हैं। और क्या कहूँ? संसार के लोग उन्हें देखते ही समझ जाते हैं, और उनके मन उनका संग पाने को ललचा उठते हैं।
अपनी ही महिमा और अपने ही नामों का कीर्तन सुनकर वे भाव-विभोर होकर नाचते हैं। नदिया के लोग अपने सुख-दुःख भूलकर प्रेम की तरंगों में तैरने लगते हैं।
वे प्रेम के रत्न खुले हाथों बाँटते हैं। वे प्रेम-रस की भारी वर्षा से सभी लोकों को सींच देते हैं। चैतन्य दास गाते हैं, वे प्रेम का अनुपम दान देते हैं। केवल मुझे ही वह दान नहीं मिला। केवल मैं ही वंचित रह गया।