Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मन आमार् हुँसा'र् थेको, भूलो' नाको

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(मन आमार्) हुँसा'र् थेको, भूलो' नाको, शुद्ध सहज तत्त्व-धने नोइले मायार् वशे, अवशेषे, काँद्ते ह'बे चिरो-दिने
अर्थ

हे मेरे मन! सावधान और सजग रहो, शुद्ध सहज तत्त्व के इस धन को मत भूलो। अन्यथा अंत में माया के फंदे में पड़कर तुम्हें सदा रोना पड़ेगा।

शुद्ध-जीवे जड नाइ भाइ, ठिक बुझो ताइ, निजे सखी (से) वृन्दावने से जखन् कृष्ण-चन्द्रे भजे, सुखेते मजे, मधुर-रसे अनुक्षणे
अर्थ

शुद्ध जीवात्मा जड़ नहीं है, हे भाई, इसे ठीक से समझो, वह तो वृन्दावन की एक सखी ही है। जब वह अपने प्रियतम कृष्णचंद्र की भक्ति करती है, तब वह सुख में डूब जाती है और निरंतर मधुर रस का आस्वादन करती रहती है।

जद-देहे ता'र् साधन-भक्ति, ज्ञान-विरक्ति, देहेर् यात्रा धर्म-भावे से गृहे थाके, बने बा थाके, मजिये डाके, ('कृष्ण') बोले' एक-मने
अर्थ

भौतिक शरीर में रहते हुए भी वह साधना-भक्ति करती है, ज्ञान के द्वारा वैराग्य विकसित करती है, और इस प्रकार धर्म के अनुसार जीवन बिताती है। ऐसी साधिका घर में रहे या वन में, वह एकाग्र मन से 'कृष्ण, कृष्ण' पुकारते हुए तल्लीन रहती है।

एके-इ तो' बोलि सहज-भजन्, शुद्ध-मन, कृष्ण पा'बार् एक उपाय इहा छाडि' जे आरोप कोरे, सेइ तो' मरे, ता'र् तो' नाहि भजन् होय्
अर्थ

सचमुच इसे ही सहज-भजन कहा जाता है। यह शुद्ध मन से किया जाता है, और कृष्ण को पाने का यही एकमात्र उपाय है। जो इस मार्ग से हटकर अपनी मनगढ़ंत कल्पना थोप देता है, वह वास्तव में नष्ट हो जाता है, उसका वह कर्म भजन नहीं कहलाता।

चाँद-बाउलेर् ए विश्वास्, छोट हरिदास्, एकटु केवल विपथे चले' शची-सुतेर् कृपाय्, दूर हो'ये, हाय्, ना पाय् आर् गौर-चरणे
अर्थ

यही चाँद बाउल का विश्वास है। महाप्रभु के भक्त छोटे हरिदास थोड़ा-सा ही कुमार्ग पर चले, और शचीसुत की कृपा से वे दूर कर दिए गए। हाय, फिर वे गौरांग के चरण कभी न पा सके।