Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
नाचत गौर पूरब रसे भोर कनक धराधर गरब बिभञ्जन झलकत अङ्ग अतनु चित-चोर
अर्थ

कृष्णरूप में अपनी पूर्व लीलाओं के रस का आस्वादन करते हुए भगवान गौर नृत्य करते हैं। उनके चमकते अंग, जो सुमेरु पर्वत के गर्व को चूर करते हैं, कामदेव के मन को मोहित कर लेते हैं।

हासत मृदु मृदु बदन छान्द छबि नाशत घोर कलुष आन्धियार धर-इते ताल तरल पद-पङ्कज कम्प-इ धरणी सह-इ नाहि भार
अर्थ

उनके मधुर मधुर मुसकाते मुख की छटा भयानक पापों के अंधकार को नष्ट कर देती है। उनके ताल में नाचते चरणों की गति से पृथ्वी कांप उठती है। पृथ्वी में उनका भार सहने की शक्ति नहीं है।

तरुण अरुण-युग लोचन डगमग अबिरल बिपुल पुलक-कुल साजि गरजत सघन सिंह जिनि बिक्रम बली कलि-काल बिपुल भये भाजि
अर्थ

उनके नये लाल कमल जैसे नेत्रों से प्रेम के आँसू लगातार उमड़ते रहते हैं। उनके शरीर के रोम खड़े हैं। सिंह के पराक्रम को भी मात देते हुए वे गरजते हैं। डरकर बलवान कलियुग भाग जाता है।

भेदत गगन गाने प्रिय परिकर बायत खोल ललित करताल मातल अखिल लोक भण नरहरि भुबन भरल यश बिषद बिशाल
अर्थ

उनके प्रिय सहचर सुंदरता से खोल और करताल बजाते हुए गाते हैं। उनका गर्जनशील संगीत आकाश को भेद देता है। अब समस्त लोक प्रेमोन्माद में डूब गए हैं। नरहरि कहते हैं, अब भगवान गौर की उज्ज्वल निर्मल महिमा सब लोकों को भर देती है।