नाचत नट बर गौर किशोर
नर्तकों में श्रेष्ठ गौर-किशोर नृत्य करते हैं। उनकी नवीन और सुन्दर भाव-भंगिमाएँ सभी लोकों को आनन्द से उन्मत्त कर देती हैं।
उनके चमकते अंगों की अनुपम शोभा देखकर कितने ही कामदेव मोहित होकर मूर्च्छित हो जाते हैं!
उनके विशाल नेत्र चंचल हैं। उनके वक्षस्थल पर वन-माला हिलती-डुलती रहती है।
चकोर पक्षी जैसे भक्त अपनी आँखों से गौर प्रभु रूपी चमकते चन्द्रमा की अमृत भरी चाँदनी पीते हैं।
गौर प्रभु मधुर स्वर में हरि के पवित्र नामों का गान करते हैं। उन्हें सुनकर कौन निरन्तर रोए बिना रह सकता है?
पतित पापी प्रेम के मधुर रस का स्वाद लेकर उन्मत्त हो गए हैं। परन्तु हाय! नरहरि का कठोर हृदय प्रेम के आनन्द में नहीं पिघलता।