Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

नाचये चैतन्य चिन्तामणि

नाचये चैतन्य चिन्तामणि बुक बहि धारा मुकुता गान्थनि
अर्थ

चिन्तामणि-स्वरूप चैतन्य नाचते हैं। उनके वक्ष से मोतियों की माला के समान आँसुओं की धारा बहती है।

प्रेमे गद गद हैया धरणी लोटाय हुहुङ्कार दिया खेने उठिया दाण्डाय
अर्थ

प्रेम से गद्गद होकर वे धरती पर लोट जाते हैं। वे हुंकार भरते हैं और क्षणभर में उठकर खड़े हो जाते हैं।

घन घन देन पाक ऊर्ध्व-बाहु करि पतित-जनारे पहुं बोलाय हरि हरि
अर्थ

बाहें ऊँची उठाकर वे बार-बार मण्डल बनाकर नाचते हैं। वे पतित जनों को भी 'हरि! हरि!' पुकारने के लिये प्रेरित कर देते हैं।

हरि-नाम करे गान जपे अनुक्षण बुझिते ना पारे केह बिरल लक्षण
अर्थ

वे प्रतिक्षण हरि-नाम का कीर्तन और जप करते हैं। उनके इन विरल प्रेम-लक्षणों को कोई नहीं समझ सकता।

अपार महिमा-गुण जग-जने गाय बसु रामानन्द ताहे प्रेम-धन चाय
अर्थ

संसार के लोग उनकी अपार महिमा के गीत गाते हैं। वासु रामानन्द उस प्रेम-धन को पाने की आकांक्षा करते हैं, जिसे वे बाँट रहे हैं।

इस भजन के बारे में

पद
5