- पद 1भजननाचत गौरचन्द्र नट-भूप
मनमथ लाख गरब-भर-भञ्जन, अखिल-भुबन-जन-रञ्जन रूप - पद 1अर्थनर्तकों के राजा भगवान गौरचन्द्र नृत्य करते हैं। उनका सुंदर रूप समस्त लोकों के हृदय को आनंदित करता है। वे लाखों कामदेवों के गर्व को चूर चूर कर देते हैं।
- पद 2अर्थप्रेमभाव से अभिभूत होकर वे गर्जना करते हैं। वे अद्भुत रूप से तेजोमय और गौरवशाली हैं। पृथ्वी अब उनके मंगलमय चरणों को धारण करती है। उनकी दीर्घ भुजाएं सुंदर हैं।
“गौर आरती” के परिणाम
439 भजन · 566 पद भजन के शब्दों में · 472 पद अर्थ में
इनमें से कोई भी शब्द वाले भजन, सारे शब्दों वाले पहले। केवल सारे शब्दों वाले भजन
1 पद भजन में
2 पद अर्थ में
1 पद भजन में
2 पद अर्थ में
- पद 1भजननाचत गौर निखिल नट-पण्डित निरुपम भङ्गी मदन-मद हर-इ
प्रचुर चण्डकर-दरपरि-भञ्जन, अङ्ग-किरणे दिग-बिदिग उजर-इ - पद 1अर्थनृत्य के परम विद्वान पण्डित भगवान गौर अपनी अनुपम भाव-भंगिमाओं से नृत्य करते हैं, जो कामदेव के गर्व को हर लेती हैं। भगवान गौर के अंगों की कान्ति, जो सूर्य के गर्व को भी चूर कर देती है, समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर देती है।
- पद 4अर्थडर से काँपते हुए बलवान दुर्जन भगवान् गौर के चरणों की शरण लेते हैं। नरहरि के स्वामी कीर्तन की ध्वनि से सारे लोक भर देते हैं। वे सबसे दुर्लभ धन इस संसार को खुले हाथों भेंट में देते हैं।
1 पद भजन में
2 पद अर्थ में
- पद 1भजननाचत गौर नटन पण्डित-बर
कुङ्कुम-दामिनी-दाम-दमन तनु, मण्डित निरुपम बिपुल पुलक-भर - पद 1अर्थनृत्य के महान पण्डित भगवान गौर नृत्य करते हैं। उनका रूप कुंकुम और विद्युत की चमक को भी लजा देता है। उनके रोम रोम का पुलकित होना ही उनका अनुपम आभूषण है।
- पद 4अर्थखोल और खमक कितनी तालों में बजते हैं! प्रभु के दिव्य सहचर मधुर-मधुर गीत गाते हैं। भगवान् गौर संसार को प्रेम का अनमोल उपहार खुले हाथों देते हैं। वे उस उपहार से संसार को भर देते हैं। केवल दुष्ट-हृदय, अधम नरहरि को वह उपहार नहीं मिला। केवल वही ठगा गया।
1 पद भजन में
2 पद अर्थ में
1 पद भजन में
2 पद अर्थ में
- पद 1भजनगौराङ्ग पतित-पाबन तुया नाम
कलि-जीब यत आछिल कृत-पातकी
दे-ओलि सबे निज-ठाम - पद 1अर्थहे गौरांग, आपका नाम पतित-पावन है। कलियुग के सभी पापियों को आप अपने ही धाम में शरण देते हैं।
- पद 4अर्थयदि किसी के शरीर में अब भी पाप शेष हैं, तो उसने गौर प्रभु की महिमा न सुनी होगी, न उसका सम्मान किया होगा। वल्लभ दास कहते हैं, ऐसे व्यक्ति के हृदय में गहरी पीड़ा होती है। ऐसे व्यक्ति के मुख में काली राख भर जाती है।
2 पद भजन में
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2 पद भजन में
2 पद भजन में
2 पद भजन में
2 पद भजन में
2 पद भजन में
2 पद भजन में
2 पद भजन में
1 पद भजन में
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- पद 1भजननचे नचे निताइ गौर् गुण मणिय
नाचे नाचे निताइ गौर् गुण मणिया
(नचे नचे निताइ गौर् द्वीज मणिय)
बामे प्रिय गदाधर, श्रीवास अद्वैत बर, …
1 पद भजन में
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- पद 1भजननमो महा-वदान्याय कृष्ण-प्रेम-प्रदाय ते
कृष्णाय कृष्ण-चैतन्य-नाम्ने गौर-त्विषे नमः
1 पद भजन में
1 पद अर्थ में
1 पद भजन में
1 पद अर्थ में