Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

सिंह द्वार त्यजि गोरा समुद्र आडे धाय

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सिंह-द्वार त्यजि गोरा समुद्र आडे धाय कोथा कृष्ण कोथा कृष्ण सभारे सुधाय
अर्थ

सिंहद्वार को छोड़कर श्री गौर समुद्र की ओर दौड़ते हैं। "कृष्ण कहाँ हैं? कृष्ण कहाँ हैं?" वे पुकारते हैं।

चौदिके भकत-गण हरि-गुण गाय माझे कनया गिरि धूलाय लोटय
अर्थ

चारों ओर से घेरकर भक्तजन श्री हरि की महिमा गाते हैं। श्री गौर धूल में लोटते हुए स्वर्ण पर्वत के समान हो गए हैं।

आछाडिया पडे अङ्ग भूमे गडि याय दीघल शरीरे गोरा पडि मूरछाय
अर्थ

श्री गौर भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनका ऊँचा शरीर अब मूर्च्छित है।

उत्तान शयन मुखे फेन बहि याय बासुदेब घोषेर हिया बिदरिया याय
अर्थ

वे पीठ के बल पड़े हैं। उनके मुख से झाग निकलता है। अब वासुदेव घोष का हृदय टुकड़ों में बिखर जाता है।