श्री गोवर्धन स्तुति
अरी सखियो! हरि के दासों में यह पर्वत सबसे श्रेष्ठ है। बलराम और कृष्ण के चरणों के स्पर्श से यह आनन्द में भर जाता है और उनका तथा उनकी गायों का पीने के जल, कोमल घास, गुफाओं और कन्द-मूलों से आदर करता है।
पर्वतों के राजा गोवर्धन की जय हो! गोपियों ने इन्हें हरि के दासों में श्रेष्ठ कहा है। इन्द्र का यज्ञ रुकवाकर श्रीकृष्ण ने स्वयं इनकी पूजा की, और ये सात दिन तक उनके कमल जैसे हाथ की हथेली पर टिके रहे।
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