Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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विभावरी शेष, आलोक-प्रवेश, निद्रा छारि' उठो जीव बोलो हरि हरि, मुकुन्द मुरारि, राम कृष्ण हयग्रीव
अर्थ

रात्रि समाप्त हो गई और प्रभात का प्रकाश प्रवेश कर रहा है। हे जीव! निद्रा त्यागकर उठ जाओ और हरि, हरि बोलो, मुकुंद, मुरारि, राम, कृष्ण, हयग्रीव।

नृसिंह वामन, श्री-मधुसूदन, ब्रजेन्द्र-नन्दन श्याम पूतना-घातन, कैटभ-शातन, जय दाशरथि-राम
अर्थ

वे नृसिंह और वामन के रूप में अवतरित हुए, वे मधुसूदन हैं। वे व्रजराज के श्यामवर्ण दुलारे पुत्र हैं। वे पूतना का वध करने वाले और कैटभ का नाश करने वाले हैं। दशरथि राम की जय हो!

यशोदा दुलाल, गोविन्द-गोपाल, वृन्दावन पुरन्दर गोपी-प्रिय-जन, राधिका-रमण, भुवन -सुन्दर-बर
अर्थ

वे यशोदा के दुलारे हैं, गोविंद और गोपाल हैं, वृन्दावन के राजा हैं। वे गोपियों के प्रियतम और राधा-रमण हैं, और सारे लोकों में सबसे सुंदर हैं।

रावणान्तकर, माखन-तस्कर, गोपी-जन-वस्त्र-हारी ब्रजेर राखाल, गोप-वृन्द-पाल, चित्त-हारी बंशी-धारी
अर्थ

वे रावण का अंत करने वाले हैं, माखन चुराने वाले और गोपियों के वस्त्र हरने वाले हैं। वे व्रज के ग्वाल-बाल हैं, गोपों के रक्षक हैं, सबका चित्त चुराने वाले और सदा बांसुरी धारण करने वाले हैं।

योगीन्द्र-बन्दन, श्री-नन्द-नन्दन, ब्रज-जन-भय-हारी नवीन नीरद, रूप मनोहर, मोहन-बंशी-बिहारी
अर्थ

वे योगीन्द्रों द्वारा वंदित हैं, नंद के दुलारे पुत्र हैं, और व्रजवासियों के भय को दूर करने वाले हैं। वे नवीन मेघ के समान श्याम हैं, उनका रूप मनोहर है, और बांसुरी बजाते हुए विचरण करते समय वे अत्यंत मोहक दिखते हैं।

यशोदा-नन्दन, कंस-निसूदन, निकुञ्ज-रास-विलासी कदम्ब-कानन, रास-परायण, बृन्द-विपिन-निवासी
अर्थ

वे यशोदा के पुत्र और कंस का वध करने वाले हैं, वे कुंजों में रास-विलास करते हैं। वे कदंब के वन में रास में तत्पर रहते हैं, और वृंदा के वन में निवास करते हैं।

आनन्द-वर्धन, प्रेम-निकेतन, फुल-शर-जोजक काम गोपाङ्गना-गण, चित्त-विनोदन, समस्त-गुण-गण-धाम
अर्थ

वे भक्तों के आनंद को बढ़ाने वाले हैं, प्रेम के धाम हैं, और फूलों के बाणों वाले दिव्य कामदेव के समान गोपियों की प्रेम-भावना को बढ़ाने वाले हैं। वे गोपियों के चित्त को प्रसन्न करने वाले हैं और समस्त सद्गुणों के आगार हैं।

जामुन-जीवन, केलि-परायण, मानस-चन्द्र-चकोर नाम-सुधा-रस, गाओ कृष्ण-जश राखो वचन मन मोर
अर्थ

वे यमुना के जीवन हैं, सदा प्रेम-लीलाओं में लीन रहते हैं, और गोपियों के मन रूपी चकोर पक्षियों के लिए चंद्रमा के समान हैं। हे मन! मेरी यह बात मानो और अमृत रस से भरे इन नामों में कृष्ण की महिमा का गान करो।

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर। सभी भक्त गायकों की जय।