आजु बिरह भाबे गौराङ्गसुन्दर
विरह के भाव से अभिभूत होकर श्री गौरांगसुन्दर भूमि पर गिर पड़ते हैं। रोते हुए वे कहते हैं, "मेरे प्राणनाथ कहाँ हैं?"
वे मूर्च्छित हो जाते हैं। उनकी साँस बहुत धीमी पड़ जाती है। यह देखकर सबके मन डर से भर जाते हैं।
जब भक्त ऊँचे स्वर में श्री हरि का नाम गाते हैं, तो श्री गौर सुनकर होश में आ जाते हैं। उनकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
यह देखकर सब लोग रो पड़ते हैं। यह राधामोहन दास अपना सब कुछ श्री गौर को समर्पित करता है।