Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
आजु गोरा नगर-कीर्तने साजिया चलये प्रिय परिकर सने
अर्थ

अपने प्रिय पार्षदों से घिरे हुए, गौर प्रभु नगर में संकीर्तन करते हैं।

अङ्गेर सु-बेश भाल शोभे नाचे नाना भङ्गीते भुबन-मन मोहे
अर्थ

उनका सुसज्जित रूप अत्यन्त शोभायमान है। नाना प्रकार की भाव-भंगिमाओं से नृत्य करते हुए वे सारे संसार के मन को मोहित कर लेते हैं।

प्रेम बरिषये अनिबार बहये आनन्द-नदी नदीया माझार
अर्थ

वे निरन्तर प्रेम की वृष्टि करते हैं। नदिया में वे आनन्द की एक नदी बहा देते हैं।

देब-गण मिशा-इ मानुषे बरिषे कुसुम कत मनेर हरिषे
अर्थ

देवगण मनुष्यों के बीच मिल जाते हैं। उनके मन आनन्द से भरे हैं। वे कितनी ही बार फूलों की वर्षा करते हैं!

नगरिया लोक सब धाय मनेर मानसे गोराचान्द गुण गाय
अर्थ

नगर के लोग दौड़ पड़ते हैं। वे अपने मन से गौर प्रभु का गुणगान करते हैं।

मूढ-गण शुनि सिंह-नाद ह-इया बिरस मन गणये प्रमाद
अर्थ

कुछ मूढ़ लोग, भय से जिनका मन विचलित हो जाता है, इस गर्जनकारी कीर्तन को सिंहों की दहाड़ समझ बैठते हैं।

लाखे लाखे दीप ज्वले भाल उपमा कि अबनी गगन करे आलो
अर्थ

लाखों-लाखों जगमगाते दीप जलते हैं। धरती और आकाश को भर देने वाले उस प्रकाश की मैं किससे तुलना करूँ?

नरहरि कहिते कि जाने मातिल जगत के-उ धैरज ना माने
अर्थ

नरहरि क्या कहें? वे नहीं जानते। सारा संसार आनन्द से उन्मत्त हो गया है। अब किसी के भी मन को शान्ति नहीं है।