Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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1 टेक
आजु कि आनन्द सङ्कीर्तने नाचे गौर नित्यानन्द परम आनन्द-कन्द प्रिय पारिषद-बृन्द सने
अर्थ

आज इस संकीर्तन में कितना आनंद उपस्थित है! अपने प्रिय सहचरों से घिरे हुए, परम आनंद के मूल भगवान गौर और भगवान नित्यानन्द नृत्य करते हैं।

नाचे बोले भाल भाल बाजे खोल करताल सबे महा बिह्वोल प्रेमाय नदीरा प्रबाह पारा सबार नयने धारा केह केह पडे कार गाय
अर्थ

वे नाचते हुए पुकारते हैं, 'जय! जय!' भक्त खोल और करताल बजाते हैं। सभी प्रेम में विभोर हैं। सबकी आँखों से आँसुओं की नदियाँ उमड़कर बहती हैं। कोई आनन्द से गाता है, कोई भाव में विभोर होकर धरती पर गिर पड़ता है।

केह बा पुलक-भरे हुङ्कार गर्जन करे काम्पे केग थिर हैते नारे केह कारु पाने चाञा दु-इ बाहु पसारिया कोले करि छाडिते ना पारे
अर्थ

किसी के शरीर के रोम खड़े हो जाते हैं। कोई ऊँचे स्वर में गरजता है। कोई काँपने लगता है। कोई शान्त और स्थिर नहीं रह पाता। कोई भगवान् गौर की ओर देखता है। कोई अपनी बाहें फैलाकर दूसरे भक्तों को गले लगा लेता है और छोड़ता ही नहीं।

केह कारु पाय धरे पद-धूलि लय शिरे केह भूमे पडि पडि याय प्रभु भृत्य एक रिति देखि नरहरि अति आनन्दे प्रभुर गुण गाय
अर्थ

कोई भक्तों के चरण पकड़कर उनकी चरण-धूलि अपने सिर पर रखता है। कोई चलते चलते ठोकर खाकर बार बार भूमि पर गिर जाता है। दोनों प्रभुओं को नृत्य करते देखकर सेवक नरहरि आनंदित होकर दोनों प्रभुओं की महिमा का गान करते हैं।