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अनन्द चन्द्रिकख्यम् रध दस नम स्तोत्रम्

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

रध दमोदर-प्रेस्थ रधिक वर्सभनवि समस्त-बल्लवि-व्र्न्द धमिल्लोत्तम्स-मल्लिक
अर्थ

राधा, दामोदर की परम प्रिया; राधिका, वृषभानु की पुत्री; समस्त गोपियों के जूड़े को सुशोभित करने वाली मल्लिका-पुष्प।

क्र्स्न-प्रियवलि-मुख्य गन्धर्व ललित-सखि विसख-सख्य-सुखिनि हरि-ह्र्द्-भ्र्न्ग-मस्जरि
अर्थ

कृष्ण की प्रिय सखियों में अग्रगण्य; गान्धर्वा, ललिता की सखी; विशाखा के सान्निध्य से आनंदित होने वाली; हरि के हृदय रूपी भ्रमर के लिए पुष्प-कलिका।

इमम् व्र्न्दवनेस्वर्य दस-नम-मनोरम अनन्द-चन्द्रिकम् नम यो रहस्यम् स्तुतिम् पथेत्
अर्थ

जो कोई वृन्दावनेश्वरी के इन दस मनोहर नामों की यह गोपनीय स्तुति, जिसे आनंद-चन्द्रिका अर्थात् आनंद की चाँदनी कहते हैं, पाठ करता है,

स क्लेस-रहितो भुत्व भुरि-सौभग्य-भुसितह् त्वरितम् करुन-पत्रम् रध-मधवयोर् भवेत्
अर्थ

वह समस्त कष्टों से मुक्त होकर प्रचुर सौभाग्य से सुशोभित हो जाता है, और शीघ्र ही राधा-माधव दोनों की कृपा का पात्र बन जाता है।