Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
आरे मोर नाचत गौर-किशोर हिरण-किरण जिनि ओ तनु सुन्दर दश-दिश करल उजोर
अर्थ

अरे! मेरे गौर-किशोर नाचते हैं! स्वर्ण की चमक को भी लजाता हुआ उनका सुन्दर रूप दसों दिशाओं को प्रकाशित कर देता है।

शारद-चान्द जिनि झलमल बदनहि रोचन तिलक सु-भाल कुञ्चित चारु चिकुर तहि लोलत कमले किये अलि-जाल
अर्थ

शरद के चन्द्रमा को भी हरा देने वाला उनका मुख झिलमिलाता है। रोचन-तिलक से सजा उनका सुन्दर माथा शोभा पाता है। क्या उनके सिर के घुँघराले, इधर-उधर लहराते काले केश किसी पीले कमल के चारों ओर मँडराते काले भौंरों का झुंड हैं?

नासा तिल-फुल बिमब अधर तल चुयत बिन्दु बिन्दु घाम तरुण अरुण सरसिज जिनि लोचन धारा बहे अबिराम
अर्थ

उनकी नासिका तिल के फूल-सी है, अधर बिम्ब फल-से हैं। उनके शरीर पर पसीने की बूँदें झलक रही हैं। नये अरुण कमल को भी लजाते उनके नेत्रों से आँसुओं की अविरल धारा बहती रहती है।

गान्थिया आपन गुण परकाशि कीर्तन गा-ओत सहचर-बृन्दे खोल करताल यतन करि सिरजिल पाषण्ड दलन अनुबन्धे
अर्थ

अपने साथियों के साथ संकीर्तन में वे अपने ही स्वरूप की महिमा प्रकट कर गाते हैं। खोल और करताल बज उठते हैं। अब पापियों के पाप चूर-चूर हो जाते हैं।

अबनीते अदभुत प्रभु शची-नन्दन पतित-पाबन अबतार दीन-हीन मूढ-मति रामानन्द दास अति पहुं मोरे कर भब-पार
अर्थ

अब सारी पृथ्वी आश्चर्य से भर गई है। शची-पुत्र, जो पतितों के उद्धारक हैं, इस संसार में अवतरित हुए हैं। रामानन्द दास अत्यन्त दीन-हीन और मूढ़-बुद्धि है। हे प्रभु, मुझे संसार-सागर के पार कर दीजिए।