Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अशेष गुणेर निधि गौराङ्ग सुन्दर

अशेष गुणेर निधि गौराङ्ग-सुन्दर आनन्दे बिभोर सदा नदीया-नागर
अर्थ

प्रभु गौरांगसुन्दर समस्त दिव्य गुणों के भण्डार हैं। नदिया के नगरों में वे सदा आध्यात्मिक आनन्द में विभोर रहते हैं।

इन्दु जिनि बदनेर शोभा मनोहर ईश्वर ब्रह्मादि यारे भाबे निरन्तर
अर्थ

उनके सुन्दर मुख की मनोहर शोभा चन्द्रमा को भी जीत लेती है। शिव, ब्रह्मा और सभी देवता सदा प्रेमानन्द में भरकर उनकी उपासना करते हैं।

उद्धारिला जग-जने दिया प्रेम-धन उन पापी तापी नाहि कैल बिचारण
अर्थ

प्रेमरूपी महान धन देकर वे जगत के लोगों का उद्धार करते हैं। यह दान देते समय वे पापियों और कठोर तप करने वाले तपस्वियों में कोई भेद नहीं करते।

ऋण शुधिबार प्रभु श्रीमती राधार रीतिमत नदीयार हैल अबतार
अर्थ

श्रीमती राधारानी का ऋण चुकाने के लिए प्रभु नदिया में इस संसार में अवतरित हुए हैं और उन्होंने भक्त की भूमिका स्वीकार की है।

लिप्त श्री-गौराङ्ग-तनु श्री-हरिचन्दने लीलाबती नारी हेरि हय अचेतने
अर्थ

भगवान गौरांग का गौर शरीर चन्दन के लेप से सजा है। उन्हें देखकर नदिया की युवतियाँ आध्यात्मिक आनन्द में विभोर होकर अचेत हो जाती हैं।

एमन दयालु प्रभु नाहि हबे आर ऐकान्तिक कृष्ण-भक्ति करिल प्रचार
अर्थ

भगवान गौरांग जैसा दयालु और कोई कभी नहीं होगा। वे भगवान कृष्ण की शुद्ध और अनन्य भक्ति की महिमा का प्रचार करते हैं।

ओढ्र-देश या-इया प्रभु बहु लीला हैल औदार्य-गुणेते सार्बभौम निस्तारिल
अर्थ

भगवान गौरांग उड़ीसा गए और वहाँ उन्होंने अनेक लीलाएँ कीं। अपनी महान और उदार कृपा से भगवान गौरांग ने सार्वभौम का उद्धार किया।

चतुर्दश स्वराबली ये करे कीर्तन अचिरे लभये से-इ गौराङ्ग-चरण
अर्थ

जो कोई भगवान गौरांग की महिमा की इन चौदह पंक्तियों का कीर्तन करता है, वह शीघ्र ही भगवान गौरांग के चरण प्राप्त कर लेता है।

श्री-जाह्नबा रामचन्द्र-पद करि आश चतुर्दश स्वराबली गाय प्रेम-दास
अर्थ

रामचन्द्र दास और श्री जाह्नवा देवी के चरण पाने की आशा करते हुए प्रेम दास भगवान गौरांग की महिमा की इन चौदह पंक्तियों को गाता है।

टिप्पणी: इस गीत की पंक्तियों के पहले अक्षर बंगला वर्णमाला के स्वरों के क्रम में हैं (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ॡ, ए, ऐ, ओ, औ)।

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पद
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