Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

भब सागर बर दुरतर दुरग्रह

भब सागर बर दुरतर दुरग्रह दुरन्त गति सु-बिथार निमगन जगत पतित सब आकुल को-इ ना पा-ओल पार
अर्थ

बार-बार होने वाले जन्म और मृत्यु का सागर भयानक और विशाल है। संसार के लोग उसमें डूब रहे थे। पतित जीव व्याकुल थे। कोई भी तैरकर किनारे तक नहीं पहुँच पाता था।

टेक
जय जय निता-इ गौर अबतार हरि-नाम प्रबल तरणी अबलम्बये करुणाय करल उद्धार
अर्थ

जय हो, जय हो गौर प्रभु और निताई प्रभु की, जो इस संसार में अवतरित हुए! दया करके डूबते जीवों को उठाकर उन्होंने उन्हें भगवान कृष्ण के पवित्र नामों की मज़बूत नाव में बिठाया और उनका उद्धार किया।

अज भब अदि ब्यास शुक नारद अन्त ना पाय-इ यान्3र ऐछन प्रेम पतित जने बितर-इ को अछु करुणा अपार
अर्थ

ब्रह्मा, शिव, व्यास, शुकदेव, नारद तथा सभी देवता और ऋषि भी प्रेम के उस सागर का किनारा नहीं पा सके। गौर प्रभु और निताई प्रभु ने पतित लोगों को प्रेम का दान दिया। उनके जैसी असीम करुणा और किसमें है?

हेन अबतार आर किये होयब रसिक भकत-गण मेल दीन घनय्शाम सोन्3अरि भेल जर जर हृदि माहा रहि गेल शेल
अर्थ

क्या फिर कभी उनके जैसा कोई और अवतार होगा? वे रसिक भक्तों के समूह से घिरे रहते थे। उन्हें याद करके दीन घनश्याम व्याकुल हो जाता है। उसे ऐसा लगता है मानो उसके हृदय में भाला घोंप दिया गया हो।

इस भजन के बारे में

पद
4