Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जगन्नाथ मिश्रेर भबने

जगन्नाथ मिश्रेर भबने बाजे बाद्य मङ्गल बिधाने
अर्थ

जगन्नाथ मिश्र के घर में मंगलमय वाद्य बज रहे हैं।

नारी-गणे दे-इ यजकार भाट-गणे पडे कायबार
अर्थ

स्त्रियाँ संस्कार के लिए आई हैं। कवि अनेक कविताएँ पढ़ रहे हैं।

टेक
शुभ-क्षणे शचीर नन्दन यज्ण-सूत्र करये धारण
अर्थ

एक शुभ घड़ी में शची के पुत्र यज्ञोपवीत धारण करते हैं।

यज्ण-सूत्र उपमा कि आने सूक्ष्म-रूपे अनन्त आपने
अर्थ

इस यज्ञोपवीत के समान और कौन-सा यज्ञोपवीत हो सकता है? यह यज्ञोपवीत तो स्वयं भगवान अनन्त हैं, जो अत्यन्त सूक्ष्म रूप में प्रकट हुए हैं।

केश-हीन मस्तक माधुरी करे बा ना करे चित चुरि
अर्थ

अब सिर पर बाल नहीं रहे, और प्रभु का मुख मधुर तथा मनोहर लग रहा है। क्या वे सबका चित्त चुराते हैं या नहीं चुराते?

रक्त-बास परिधेय भालो रुषे दश-दिश करे आलो
अर्थ

वे केसरिया वस्त्र पहने हैं। वे दसों दिशाओं को प्रकाश से भर देते हैं।

चतुर्-दिके ब्राह्मण समाज तार माझे गोरा द्विज-राज
अर्थ

चारों ओर ब्राह्मणों की सभा है। उसके बीच में ब्राह्मणों के राजा भगवान गौर विराजमान हैं।

हाते दिब्य दण्ड-झुलि कान्धे ता देखि धैरज केबा बान्धे
अर्थ

उनके हाथ में ब्रह्मचारी-दण्ड है और कंधे पर भिक्षा की झोली है। उन्हें देखकर कौन शान्त और उदासीन रह सकता है?

बामन आबेश बेश शोहे भङ्गीते भुबन-मन मोहे
अर्थ

वे स्वयं भगवान वामन के समान सुशोभित हैं। उनकी हर भंगिमा सब लोकों के हृदयों को मोह लेती है।

हासि मृदु सु-मधुर भाषे भिक्षा मागे भकतेर पाशे
अर्थ

वे धीरे से मुस्कुराकर मधुर वचन बोलते हैं। भक्तों के पास जाकर वे भिक्षा माँगते हैं।

सबे चाहे प्राण भिक्षा दिते ये दे-इ ताहा ना भाय चिते
अर्थ

सब उनकी ओर देखते हैं। अपने हृदय में वे अपने प्राण ही उन्हें भिक्षा में दे देते हैं। मन में बिना किसी भय के वे उन्हें भिक्षा अर्पित करते हैं।

देब-नारी मानुषे निशा-इ भिक्षा देन चान्द-मुख चा-इ
अर्थ

मनुष्यों की स्त्रियों की भीड़ में घुलमिलकर देव-नारियाँ भगवान गौर के चन्द्रमा जैसे मुख को निहारती हैं। वे भी उन्हें भिक्षा देती हैं।

केबा बा ना निछये जीबन जय-ध्वनि करे सर्ब-जन
अर्थ

कौन अपना पूरा जीवन उन्हें समर्पित करके भगवान गौर की उपासना नहीं करता? सब लोग “जय!” की ध्वनि करते हैं।

भणे घनश्याम मिश्रालये सुखेर समुद्र उथलये
अर्थ

घनश्याम कहते हैं: अब जगन्नाथ मिश्र के घर में आनन्द का सागर उमड़ रहा है।

इस भजन के बारे में

पद
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