बोलो हरि बोलो
बोलो हरि बोलो (3 बार) हे भाइयों, मन के आनन्द से बोलो हरि बोलो। बोलो हरि बोलो (3 बार) जन्म-जन्म सुख से बोलो हरि बोलो।
बोलो हरि बोलो (3 बार) मानव-जन्म पाकर हे भाइयों बोलो हरि बोलो। बोलो हरि बोलो (3 बार) सुख में रहो या दुःख में रहो, बोलो हरि बोलो।
बोलो हरि बोलो (3 बार) सम्पत्ति में हो या विपत्ति में, हे भाइयों बोलो हरि बोलो। बोलो हरि बोलो (3 बार) घर में रहो या वन में रहो, बोलो हरि बोलो। कृष्ण के इस संसार में रहते हुए बोलो हरि बोलो।
बोलो हरि बोलो (3 बार) दुष्ट-संगति छोड़कर हे भाइयों बोलो हरि बोलो। बोलो हरि बोलो (3 बार) वैष्णवों के चरणों में गिरकर बोलो हरि बोलो।
बोलो हरि बोलो (3 बार) बोलो गौर-नित्यानन्द (3 बार) बोलो गौर-गदाधर (3 बार) बोलो गौर-अद्वैत (3 बार)
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- भक्तिविनोद ठाकुर · जीवनी पढ़ें
- ग्रन्थ
- गीतावली
- भाव
- पद
- 5
- रिकॉर्डिंग
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।