चेतन पा इया गोरा राय
श्री गौर राय फिर से होश में आते हैं। फिर धरती पर गिर पड़ते हैं। फिर उठते हैं।
स्वरूप दामोदर और रामानन्द राय प्रभु के सामने आते हैं। प्रभु की दशा देखकर वे पुकार उठते हैं, "हाय! हाय!"
"मेरे वंशीधर कृष्ण कहाँ हैं? क्षण भर पहले तो मैंने उनका दर्शन किया था।
"हे परम कृपालु प्रभु, कृपा करके मुझे अपना दर्शन दीजिए!"
श्री गौरचन्द्र को इस प्रकार कहते देख भक्तजन रो पड़ते हैं।
वासुदेव घोष कहते हैं, मेरे प्रभु श्री गौर श्री कृष्ण के प्रति दिव्य प्रेम से अभिभूत हैं।