भगवान के चतुर्भुज रूप का वर्णन
भगवान का श्याम रूप करोड़ों सूर्यों जैसा तेजस्वी है। उनका मुख चन्द्रमाओं और कमल के फूलों जैसा शोभायमान है।
उनके मस्तक पर अनेक रत्नों से जड़ा सुन्दर मुकुट है और कानों में शार्क के आकार के सुन्दर कुण्डल हैं।
उनके मुख की शोभा चाँदनी जैसी है। उनकी मन्द मुस्कान क्षीरसागर के झाग जैसी है।
उनकी भुजाएँ कमल की नाल जैसी हैं और उनके हाथ कमल के फूलों जैसे हैं। उनके कंगन और अन्य आभूषण अत्यन्त मनोहर हैं।
पीले वस्त्र पहने और मोतियों के हार से सजे हुए वे ऐसे हैं, जैसे श्याम वर्षा-मेघ, जिसके साथ बिजली और सफेद पक्षियों की पंक्ति हो।
वे अपनी चारों भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण करते हैं। उनकी मनोहर नाभि ब्रह्मा का जन्मस्थान है।
सुन्दर पीले वस्त्र और कमर में सुन्दर करधनी पहने हुए वे अत्यन्त मनोहर और सुन्दर दिखते हैं।
उनके चरण-कमलों के नख रत्नों की पंक्ति जैसे हैं, जो ब्रह्मा और देवताओं के मुकुटों पर सजे हैं।
उनके बाईं ओर लक्ष्मी देवी हैं, जिनकी शोभा सोने के चम्पा के फूल जैसी है। उनके दाईं ओर पृथ्वी देवी हैं, जिनकी शोभा दूर्वा घास की पत्ती जैसी है।
ध्यान में लीन सनक और अन्य ऋषि उनके पीछे रहते हैं। बहुत सी स्तुतियाँ बोलते हुए गरुड़ हाथ जोड़कर उनके सामने खड़े रहते हैं।
बहुत से मुक्त पार्षद चतुर्भुज भगवान के परम शोभायमान चरणों को निहारते हैं।
यदि मैं भगवान के इस रूप का ध्यान करूँ, तो मैं ध्यान में लीन हो जाता हूँ। अपने हृदय में मुझे केवल भगवान के अंग दिखाई देते हैं, और कुछ नहीं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- गुणराज खान
- ग्रन्थ
- श्री कृष्ण विजय
- पद
- 12