Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मङ्गलाचरण

प्रणमह नारायण अनादि निधन् सृष्टि-स्थिति-प्रलय जत ताहार कारण्
अर्थ

मैं भगवान नारायण को आदरपूर्वक दण्डवत् प्रणाम करता हूँ, जिनका कोई आदि नहीं है और जो भौतिक जगत के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं।

एक-भाबे बन्द हरि जोड करि हात् नन्द-नन्दन कृष्ण मोर प्राण-नाथ्
अर्थ

हाथ जोड़कर मैं नन्द महाराज के पुत्र कृष्ण को अपनी प्रार्थनाएँ अर्पित करता हूँ, जो मेरे जीवन-प्राण हैं।*

टिप्पणी: श्री चैतन्य-चरितामृत (मध्य 15.99-100) में श्री चैतन्य महाप्रभु इस श्लोक और इस ग्रन्थ की प्रशंसा करते हैं। वे कहते हैं:

“तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा: कुलीन-ग्राम के गुणराज खान ने श्री कृष्ण-विजय नामक एक ग्रन्थ रचा, जिसमें एक वाक्य ऐसा है जो लेखक के कृष्ण-प्रेम की उन्मत्त अवस्था को प्रकट करता है।
“तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा: ‘नन्द महाराज के पुत्र कृष्ण मेरे जीवन-प्राण हैं।’ इस कथन के कारण मैं गुणराज खान के वंशजों के हाथों बिक गया हूँ।”

ब्रह्मा महेश्वर बन्द सृष्टिर सहाय् गणपति प्रणमह बिघ्न-हर ताय्
अर्थ

मैं ब्रह्मा और शिव को दण्डवत् प्रणाम करता हूँ, जो भौतिक जगत की सृष्टि में सहायता करते हैं, और विघ्नों को दूर करने वाले गणेश को भी आदरपूर्वक दण्डवत् प्रणाम करता हूँ।

सर्ब-देब-गणेर् बन्दिया चरण् कृष्णेर चरित्र किछु करिल रचन्
अर्थ

मैं सब देवताओं के चरणों में प्रणाम करता हूँ। अब मैं भगवान कृष्ण की लीलाओं में से कुछ लिखूँगा।

इस भजन के बारे में

रचयिता
गुणराज खान
पद
4