Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्री कृष्ण के सुन्दर रूप का वर्णन

कृष्णेर प्रसादे गोप बैसे बृन्दाबने रोग शोक भय किछुइ न जाने
अर्थ

भगवान कृष्ण की कृपा से वृन्दावन में रहने वाले गोप लोग रोग, शोक और भय के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे।

सर्ब-क्षण सर्ब-जन गोविन्द पाइल जन्म-जन्म-कृत-पाप सब दूर हैल
अर्थ

हर क्षण गोविन्द ने सबकी रक्षा की। पिछले हर जन्म के सारे पाप दूर फेंक दिए गए।

हेन-काले हैल कृष्ण द्वादश बत्सर् भुवन-मोहन रूप अति-मनोहर्
अर्थ

जब वे बारह वर्ष की आयु के हुए, तब कृष्ण अत्यन्त सुन्दर हो गए। उन्होंने सारे लोकों को मोहित कर लिया।

पूर्णिमार चन्द्र जिनि बदन-कमल् खञ्जन जिनिया शोभे नयन-जुगल्
अर्थ

उनके कमल-मुख ने पूर्णिमा के चन्द्रमा को हरा दिया। उनके मनोहर नेत्रों ने खंजन पक्षियों को हरा दिया।

मयूरेर पुच्छ शिरे कुटिल कुन्तल् हीरा-मणि-माणिक्य शोभे कर्णेर कुण्डल्
अर्थ

उनके घुँघराले केशों के ऊपर मोर-पंख था। उन्होंने माणिक और हीरों के कुण्डल पहने थे।

नाना बर्णेर पुष्प-माला हृदय-उपरे सुबर्ण-अङ्गुरी साजे बलया दुइ करे
अर्थ

उनके वक्षःस्थल पर अनेक रंगों के फूलों की माला थी। उनके हाथों में सोने की अँगूठियाँ और कंगन थे।

पायेते नुपूर साजे मुकुट शोभे माथे बालकेर सङ्गे बत्स रखे जगन्नाथे
अर्थ

उनके चरणों में नूपुर थे और सुन्दर मस्तक पर मुकुट था। बहुत से बालकों के साथ वे, जो समस्त ब्रह्माण्डों के स्वामी हैं, बछड़ों की रक्षा करते हुए अपना समय बिताते थे।

पीत-धडा-परिधान देब बन-माली नूतन मेघेते जेन पडिछे बिजली
अर्थ

पीली धोती और वनमाला से सजा हुआ उनका शरीर ऐसा था, जैसे बिजली के साथ नया वर्षा-मेघ हो।

लीलामणि दर्पण जेन मुख निरमाण् तार-मज्झे शोभे जेन बिन्दु-बिन्दु-घम्
अर्थ

उनका मुख लीला-रत्नों के दर्पण जैसा शोभायमान था। उनके पसीने की बूँदें तारों की पंक्ति जैसी थीं।

देखिया जुबती सब स्थिर नहे मन् कामेते पीडित गोपी चिन्त कृष्णेर चरण्
अर्थ

कृष्ण को देखकर उन युवतियों का मन शान्त नहीं रहा। जब उन्होंने कृष्ण के चरणों का चिन्तन किया, तब गोपियाँ कामना से पीड़ित हो गईं।

मदने दगध चित्त जुबती-समाज् स्वामीरे छाडिया भय खण्डिलेक लाज्
अर्थ

उनके हृदय उत्कट कामना में जल रहे थे, भय और लज्जा चूर-चूर हो गए थे, और उन युवतियों ने अपने पतियों को छोड़ दिया।

रात्रि दिने जुबती गोबिन्दे हैल मति गृह-कर्म छाडिलेक सकल जुबती
अर्थ

दिन-रात वे युवतियाँ कृष्ण का ही चिन्तन करती थीं। वे अपने घर के कामों के बारे में सोच नहीं पाती थीं।

कोथा आछे गोविन्दाइ जाब ताँर ठाञि कोन् प्रकारे ताँर दरशन पाइ
अर्थ

वे सोचती थीं, “कृष्ण कहाँ हैं? उनके दर्शन पाने के लिए मैं क्या करूँ?”

नेह मते गोविन्देर चिन्ते गोपी-गण् अन्तर्जामी गोसाञी जानिल तखन्
अर्थ

इस तरह कृष्ण का चिन्तन करते हुए वे उन्हें अपने हृदयों में निवास करते हुए देख सकती थीं।

जानिया त' गोविन्दाइ पाति जोगमाया करिब त' रास-क्रीडा बृन्दाबने गिया
अर्थ

उनके हृदयों की बात जानकर कृष्ण अपनी योगमाया शक्ति प्रकट करेंगे और वृन्दावन के वन में उनके साथ रास-नृत्य की लीला का आनन्द लेंगे।

नडिला जमुना-तीरे सुन्दर-कानाञि नाना ब्र्क्ष पुष्प-लता आछय तथाइ
अर्थ

सुन्दर कृष्ण यमुना के किनारे चले, जहाँ वृक्षों और लताओं पर बहुत से फूल खिले थे।

एक-चित्ते शुन नर संसार-तारण् गुणराज खान्न बोले गोविन्द-चरण्
अर्थ

हे लोगो, एकाग्र मन से सुनिए। गुणराज खान भगवान कृष्ण के चरणों का वर्णन कर रहे हैं, ऐसा वर्णन जो हमें जन्म और मृत्यु के संसार से उबार लेता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
गुणराज खान
पद
17