Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

चिन्मय वृन्दावन में श्री कृष्ण और उनके पार्षद

श्री वृन्दारण्येर् श्री योग-पीठे स-परिकार् श्री गोविन्देर् शुन शुन ओहे नर शुन साबधाने आर दिने आर क्रीडा कैल नारायणे
अर्थ

हे लोगो, सुनिए। सुनिए। एक और दिन भगवान नारायण ने जो एक और लीला की, उसे बड़े ध्यान से सुनिए।

द्वादश बत्सर हैते क्रीडे गदाधर् चौद्द बत्सेर बेला देखिते सुन्दर्
अर्थ

बारह वर्ष से चौदह वर्ष की आयु तक अपनी लीलाओं में कृष्ण बहुत सुन्दर हो गए।

किशोर बयस कृष्ण जौबनेर छटा श्यामसुन्दर कृष्ण जेन जलधर-पाटा
अर्थ

अपनी किशोर और यौवन अवस्था में कृष्ण श्यामसुन्दर थे, जैसे वर्षा ऋतु का तेजस्वी बादल हो।

कल्प-तरु मूले चिन्त करि एकेश्वर् जोग-पीठे बसि करे आसन सुन्दर्
अर्थ

मैं उन सुन्दर परम पुरुषोत्तम भगवान का ध्यान करता हूँ, जो दिव्य जगत् में कल्पवृक्ष के नीचे विराजमान हैं।

ताहार उपरे बसि आछे नन्द-बाला पूर्णिमार चन्द्र जेन उदय षोल काला
अर्थ

उनके ऊपर एक सुन्दर पूर्णिमा का चन्द्रमा है।

गोपी-गणेर सृष्टि षोडश नायिका षोडश नायिका सृष्टे एकला राधिका
अर्थ

उनके साथ सोलह सुन्दर गोपियाँ हैं, जिनमें राधा प्रमुख हैं।

बाम-पार्श्वे राधिका दक्षिणे चन्द्रावली आश-पाशे जूथे जूथे रमणी-मण्डली
अर्थ

उनकी बायीं ओर राधा हैं। दायीं ओर चन्द्रावली हैं। चारों ओर सुन्दर गोपियों की टोली पर टोली है।

चिन्तामणि मन्दिरेर चारि-खान द्वार् पश्चिम मुखेते प्रभु राधा-कान्तेर बार्
अर्थ

राधा के प्रियतम कृष्ण के पीछे चिन्तामणि रत्नों का एक विशाल महल है, जिसके चार द्वार हैं।

चारि-द्वारे चारि-द्वारी से चारि गोयाल् कृष्णेर समान बेश देखिते रसाल्
अर्थ

चारों द्वारों पर चार ग्वाल द्वारपाल थे, जिनमें से हर एक भगवान कृष्ण के ही समान मनोहर और सुन्दर था।

श्रीदामा गोयाल द्वारी पश्चिमे दुयारे पूर्बेते सुदामा द्वारी दामा उत्तरे
अर्थ

पश्चिमी द्वार पर श्रीदामा द्वारपाल हैं। पूर्वी द्वार पर सुदामा द्वारपाल हैं। उत्तरी द्वार पर दामा द्वारपाल हैं।

दक्षिणे द्वारेते द्वारी किङ्किणीक नाम् आनन्देते बृन्दाबने बिहारये कान्
अर्थ

दक्षिणी द्वार पर किंकिणीक द्वारपाल हैं। द्वारों के भीतर वृन्दावन है, जहाँ कृष्ण आनन्द से भरी अनेक लीलाएँ करते हैं।

चिन्तामणि मन्दिरे बालक् लाखे लाखे सुबल-आदि बालक सब मन्दिर राखे
अर्थ

करोड़ों-करोड़ों ग्वाल-बाल सुबल और दूसरे द्वारपालों की सहायता करते हुए चिन्तामणि रत्नों के महल की रक्षा करते हैं।

नाना अलङ्कार शोभे गले बन-माला कृष्णेर समान बेश जाने नाना कला
अर्थ

अनेक आभूषणों से सजे हुए, अनेक कलाओं के ज्ञाता और गले में वन-माला पहने ये ग्वाले स्वयं भगवान कृष्ण जैसे दिखाई देते हैं।

केह काल केह गौर सबाइ किशोर् अङ्गेर किरण ताँर अति से उजोर्
अर्थ

कोई श्याम वर्ण के हैं, तो कोई गौर वर्ण के। सभी भरे-पूरे यौवन में हैं। सभी के अंग तेजस्वी और शोभायमान हैं।

माथाय मायूर-पुच्छा गोञ्जा मनोहर् सकल गोयाला सेइ कृष्णेर सोदर्
अर्थ

गुंजा की मालाएँ और मोर-पंख के मुकुट पहने हुए सभी ग्वाले मनोहर हैं और स्वयं भगवान कृष्ण जैसे सुन्दर हैं।

काङ्खे शिङ्गा हाते बेणु करे करे बेत् कटि-तटे धटी शोभे सब पाट श्वेत्
अर्थ

हर किसी की कमर पर भैंस के सींग का बिगुल है। एक हाथ में बाँसुरी है और दूसरे में छड़ी। हर कमर पर एक सुन्दर श्वेत वस्त्र शोभा दे रहा है।

कृष्णेर आनन्दे आनन्द सब गोयाल् सु-स्वरेते गीत गाय धरिया से ताल्
अर्थ

कृष्ण जब आनन्दित होते हैं, तब सभी ग्वाले आनन्दित हो जाते हैं। वे ताली बजाते हुए मधुर स्वर में गीत गाते हैं।

कृष्णेर सेबिया सब कृष्ण-गत-चित्त मन्दिरे बेडिया सब गाय नाना-गीत
अर्थ

वे कृष्ण की सेवा करते हैं। उनके हृदय कृष्ण को समर्पित हैं। उस महल में कृष्ण को घेरकर वे अनेक गीत गाते हैं।

सेइ मन्दिर माज्झे क्रीडा करे नन्द-बाला चन्दने सज्जित अङ्ग गले बन-माला
अर्थ

चन्दन से सजे अंगों वाले और गले में वन-माला पहने नन्द के पुत्र कृष्ण उस महल में अनेक लीलाएँ करते हैं।

शिरेते मायूर-पुच्छ्/ए हाते मोहन-बंशी सुरङ्ग अधरे तार मृदु-मन्द हासि
अर्थ

उनके सिर पर मोर-पंख है। हाथ में मनमोहक बाँसुरी है। उनके चंचल होंठों पर मधुर मुस्कान है।

ब्रजाङ्गना-बेष्टित नागर् शिरोमणि पञ्चम आलापे गोपी मनोहर ध्वनि
अर्थ

व्रज की बालाओं से घिरे कृष्ण रसिक प्रेमियों के शिरोमणि हैं। गोपियाँ उनके लिए पंचम स्वर में मधुर गीत गाती हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
गुणराज खान
पद
21