गम्भीरे भितरे गौर राय
गम्भीरा के भीतर श्री गौर राय सारी रात्रि जागते रहते हैं।
क्षण-क्षण में वे विलाप करते हैं, क्षण-क्षण में रोते हैं, क्षण-क्षण में काँपते हैं।
वे अपना मुख और सिर दीवार से रगड़ते हैं। प्रभु के पास कोई नहीं रहता।
वे रोते हैं। दोनों हाथ उठाकर वे पूछते हैं, "मेरे प्राणनाथ कहाँ हैं?"
नरहरि कहते हैं, मेरे श्री गौर उसी प्रेम से अभिभूत हैं जो श्री राधा अनुभव करती हैं।