Nandgram Dham
Nandgram Dham Vaishnava Songs · nandgramdham.org/songs

गोकुल मङ्गल वंशी

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

गोकुल-मङ्गल-वंशी ध्वनिर् उद्गर्जति वन-गतये स्मर-भूपति-शासन-शंसी
अर्थ

गोकुल के लिए मंगलकारी वंशी की ध्वनि वन की ओर गूँज उठती है, यह ध्वनि कामदेव के, इच्छाओं के राजा के, आदेश की ही उद्घोषणा करती है।

किं वितनोषि मुधाङ्ग-विभूषण-कपटेनात्र विघातम् सोढुम् अहं समयस्य न सम्प्रति शक्ता लवम् अपि पातम्
अर्थ

'तुम यहाँ व्यर्थ ही, मेरे अंगों को सजाने के बहाने, यह बाधा क्यों उत्पन्न कर रही हो? मैं अभी इस नियत समय में और पल भर का भी विलम्ब सहन नहीं कर सकती।'

माधव-चरणाङ्गुष्ठ-नख-द्युतिर् अयम् उदयति हिम-धामा मा गुरुजन-भयम् उद्गिर मुहुर् इयम् अभवं धावित-कामा
अर्थ

'यहाँ माधव के चरण-नख की चन्द्रमा-सी शीतल आभा उदित हो रही है, बार-बार गुरुजनों के भय को मत दुहराओ, वह तो अब वैसी हो चुकी है जिसकी उत्कंठा उन्हीं की ओर वेग से दौड़ रही है।'

तं सेवितुम् इह पश्य सनातन-परमारण्य-जवेशम् गोप-वधू-ततिर् इयम् उपसर्पति भानु-सुता-तट-देशम्
अर्थ

'देखो, उस नित्य प्रभु की सेवा के लिए, जो इस महावन में इतनी वेग से विचरण करते हैं, गोपांगनाओं का यह समस्त समूह अब सूर्यपुत्री यमुना के तट की ओर बढ़ रहा है।'