गोकुल मङ्गल वंशी
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
गोकुल के लिए मंगलमय वंशी की ध्वनि वन की ओर गरज उठती है। यह ध्वनि कामनाओं के राजा कामदेव के आदेश की घोषणा करती है।
'तुम यहाँ व्यर्थ ही, मेरे अंगों को सजाने के बहाने, यह बाधा क्यों उत्पन्न कर रही हो? मैं अभी इस नियत समय में और पल भर का भी विलम्ब सहन नहीं कर सकती।'
देखो, माधव के चरण-नख की चन्द्रमा-सी शीतल आभा उदित हो रही है। बार-बार गुरुजनों का भय मत दोहराओ। मैं अब ऐसी हो गई हूँ कि मेरी लालसा तेज़ी से उन्हीं की ओर दौड़ रही है।
'देखो, उस नित्य प्रभु की सेवा के लिए, जो इस महावन में इतने वेग से विचरते हैं, गोपांगनाओं का यह सारा समूह अब सूर्यपुत्री यमुना के तट की ओर बढ़ रहा है।'