हरि बोलो हरि बोलो हरि बोलो भाइ रे
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4 रिकॉर्डिंगहरि बोलो, हरि बोलो, हरि बोलो भाई रे, चैतन्य और नित्यानन्द हरि-नाम लेकर आए रे। (उन्होंने हमारा दुःख देखा रे।)
आत्मा के लिए हरि-नाम के सिवा और कोई धन नहीं है रे। हरि-नाम से ही जगाई-माधाई शुद्ध हुए रे। (वे बड़े पापी थे रे।)
मैं माया से व्यर्थ बँधा हुआ हूँ रे, मेरा जीवन कट रहा है रे। (फिर भी मैं कहता हूँ, 'यह मैं हूँ' और 'यह मेरा है' रे।) मैं इच्छाओं के वश में भटकता-भटकता रहता हूँ, अब और कहाँ जाऊँ रे। (इच्छाओं का कोई अंत नहीं है रे।)
हरि बोलो भाई, इच्छाओं के मुँह पर राख डाल दो रे। (इच्छाओं से मुक्त होना ही तो सुख है रे।) भोग और मोक्ष की इच्छा छोड़कर मैं हरि-नाम गाता हूँ रे। (अब मैं शुद्ध सत्त्व में स्थित हूँ रे।)
नाम के गुण से प्रेरित हो मैं नाचता हूँ रे, अब मुझे सब कुछ शुभ मिल गया है रे। (तुच्छ वस्तुओं के लिए प्रयास मैं छोड़ चुका हूँ रे।) भक्तिविनोद कहते हैं: अब मैं नाम की सारी बाधाएँ दूर करता हूँ रे। (नाम की सब बाधाएँ मैं त्याग देता हूँ रे।)
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।