Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
हरि हरि आर कि एमन दशा हबे गौराङ्ग बलिते अङ्ग पुलके पूरिबे
अर्थ

हरि! हरि! क्या कभी मुझे वह अवस्था प्राप्त होगी, जब 'गौरांग' नाम कहते ही मेरे रोम-रोम पुलकित हो उठेंगे?

निता-इ बलिते कबे नयाने बैबे नीर अद्वैत बलिते कबे ह-इब अस्थिर
अर्थ

कब 'निताई' कहते ही मेरे नेत्रों से अश्रु बहने लगेंगे? कब 'अद्वैत' कहते ही मैं आनंद-विह्वल हो जाऊँगा?

चैतन्य निता-इ आर पहुं सीतानाथ दकिया मूर्छित हैया पडिब भूमिते
अर्थ

कब मैं 'चैतन्य! निताई! अद्वैत! हे मेरे स्वामी!' पुकारते-पुकारते मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ूँगा?

से नाम श्रबणे लैते ह-इब चेतन उठिया गौराङ्ग बलि करिब गर्जन
अर्थ

कब प्रभु का नाम सुनते ही मुझे चेत आएगा, मैं उठ खड़ा होकर 'गौरांग!' की गर्जना करूँगा?

श्री-नन्द-कुमार सह बृषभानु-सुता श्री-बृन्दाबनेते लीला कैल यथा तथा
अर्थ

श्री नन्दकुमार (भगवान कृष्ण) और श्रीमती वृषभानुसुता (श्रीमती राधारानी) ने वृन्दावन में अनेक लीलाएँ कीं।

से-इ सब लीला-स्थल देखिया देखिया से लीला स्मरण करि पडिब कान्दिया
अर्थ

कब मैं उन सब लीला-स्थलों को देखता ही रहूँगा? कब उनकी लीला का स्मरण करते हुए भूमि पर गिरकर रो पड़ूँगा?

श्री-रास-मण्डल कबे दर्शन करिब हृदये स्फुरिबे लीला मूर्छित ह-इब
अर्थ

कब मुझे श्री रासमंडल के दर्शन होंगे? कब वह लीला मेरे हृदय में साकार होकर मुझे मूर्छित कर देगी?

प्रेम-दास कहे कबे हबे हेन दिन गौराङ्गेर भक्ति-पथेर हब उदासीन
अर्थ

प्रेमदास कहते हैं: कब मैं संसार का त्याग करके गौरांग द्वारा दिखाए भक्ति-पथ पर चलूँगा? कब वह दिन आएगा?