जय जय जगन्नाथ शचीर
जय जय जगन्नाथ शचीर नन्दन्
वासुदेव घोष इस संग्रह के 37 भजनों के रचयिता हैं, जो इन ग्रन्थों से लिए गए हैं: गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन, वैष्णव आचार्यों के और भजन, श्री क्षणदा-गीत-चिन्तामणि, श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन। 37 रिकॉर्डिंग सुनी जा सकती हैं।
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जय जय जगन्नाथ शचीर नन्दन्
यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
गौराङ्ग तुमि मोरे दया ना छाडिह
सुन्दर कुण्डल नैन विशाल, गले सोहे वैजन्ती-माला
शचीर आङ्गिनाय नाचे विश्वम्भर राय
अगम अगोचर गोरा अखिल ब्रह्म-पार,
अबतार कैल बड़ बड़
अरुण बसने बिबिध भूषणे
आरे मोर आरे मोर गोरा द्विज-मणि
आहा मरि गोरा-रूपेर कि दिब तुलना
एक-मुखे कि कहिब गोराचाँदेर लीला
कि कहिब शत शत तुया अबतार
कि हेरिनु ओगो स-इ बिदगध-राज
किये हम पेखलुँ कनक पुतलिया
गोरा अभिषेक कथा अद्भुत कथन
गोरा-गुण गा-ओ शुनि
गोरा नाचे शचीर दुलालिया
गोरा हेम-जलद-अबतार
गौराङ्ग बिहर-इ परम आनन्दे
जय जय कल-रब नदीया नगरे
जय जय ध्वनि उठे नदीया नगरे
जाम्बूनद-चय रुचिर गञ्जन
तैल हरिद्रा आर कुङ्कुम कस्तूरी
नदीया आकाशे आसि उदिल गौराङ्ग-शशी
निता-इ आमार परम दयाल
निता-इ केबल पतित जनार बन्धु
निरवधि मोर मोने गोरा रूप लागियाछे
पूर्णिमा रजनी चाँद गगने उदय
बिरले बसिया एकेश्वर
बिरले बसिया एकेश्वरे
भालिरे नाचेरे मोर शचीर दुलाल
मदन मोहन मणि, गौराङ्ग बदन खानि
मायेर अङ्गुलि धरि शिशु गौर-हरि
मिश्र पुरन्दर किछु मने बिचारिया
रस-परिपाटी नट कीर्तन लम्पट
सङ्कीर्तने नित्यानन्द नाचे
सोङरि पूरब लीला त्रिभङ्ग हइया