Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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हरि हरि! बिफले जनम गोँआइनु मनुष्य-जनम पाइया, राधा-कृष्ण ना भजिया, जानिया शुनिया बिष खाइनु
अर्थ

हरि हरि! मैंने अपना जीवन व्यर्थ बिता दिया। यह दुर्लभ मानव-जन्म पाकर भी मैंने राधा-कृष्ण की भक्ति नहीं की, और जान-बूझकर विष पी लिया।

गोलोकेर प्रेम-धन, हरि-नाम-सङ्कीर्तन, रति ना जन्मिलो केने ताय् संसार-बिषानले, दिबा-निशि हिया ज्वले, जुराइते ना कोइनु उपाय्
अर्थ

गोलोक का प्रेम-धन ही हरि-नाम संकीर्तन है, फिर इसके लिए मेरे मन में रुचि क्यों नहीं जगी? संसार की विष-अग्नि में मेरा हृदय दिन-रात जलता रहता है, और इसे शीतल करने का कोई उपाय मैंने नहीं किया।

ब्रजेन्द्र-नन्दन जेइ, शची-सुत होइलो सेइ, बलराम होइलो निताइ दीन-हीन जत छिलो, हरि-नामे उद्धारिलो, तार शाक्षी जगाइ माधाइ
अर्थ

व्रजेन्द्र-नन्दन कृष्ण ही शची-सुत बने, और बलराम निताई बने। जितने भी दीन-हीन जन थे, उन सबका हरि-नाम ने उद्धार किया, इसके साक्षी हैं जगाई-माधाई।

हा हा प्रभु नन्द-सुत, वृषभानु-सुता-जुत, कोरुणा करोहो एइ-बारो नरोत्तम-दास कोय्, ना ठेलिहो राङ्गा पाय्, तोमा बिने के आछे आमार
अर्थ

हा हा प्रभु! हे नन्द-सुत, वृषभानु-नन्दिनी के साथ, अब मुझ पर कृपा करें। नरोत्तम दास कहते हैं, हे प्रभु, अपने लाल-लाल चरणों से मुझे दूर मत धकेलिए, आपके सिवा मेरा और कौन है?

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।