'गौराङ्ग' बोलिते हबे
'गौरांग' कहते ही जब मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा, वह शुभ क्षण कब आएगा? और 'हरि हरि' कहते हुए मेरे नेत्रों से अश्रु कब बहेंगे?
और कब चन्द्रमुख नित्यानन्द की कृपा मुझ पर होगी, जिससे मेरी सांसारिक वासना तुच्छ हो जाए?
विषयों को छोड़कर कब मेरा मन शुद्ध होगा? कब मैं श्री वृन्दावन के दर्शन करूँगा?
श्री रूप और रघुनाथ दास के चरणों के लिए मेरे मन में कब उत्कण्ठा होगी, जिससे मैं उस युगल-प्रीति को समझ सकूँ?
श्री रूप और रघुनाथ दास के चरणों में ही मेरी आशा बनी रहे, नरोत्तम दास सदा यही प्रार्थना करते हैं।
इस भजन के बारे में
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- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।