Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

हरि हरि! कि मोर करम गति मन्द

Read in English

दिखाएँ
टेक्स्ट
हरि हरि! कि मोर करम गति मन्द ब्रजे राधा-कृष्ण पद ना सेविनु तिल-आध ना भूझिनू रागेर सम्बन्ध
अर्थ

हे हरि, हे हरि! मेरे कर्मों की गति कितनी मंद है! मैंने व्रज में राधा-कृष्ण के चरणों की सेवा एक पल के लिए भी नहीं की, और राग के इस संबंध को कभी नहीं समझा।

स्वरूप सनातन रूप रघूनाथ भट्ट-यूगौ भूगर्भ श्री-जीव लोकनाथ इहाँ सबार पाद-पद्म ना सेविनू तिल-आध किसे आर पुरिबेक साध
अर्थ

स्वरूप दामोदर गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, रूप गोस्वामी, रघुनाथ दास गोस्वामी, रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, गोपाल भट्ट गोस्वामी, भूगर्भ गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी और लोकनाथ गोस्वामी, इन सबके चरण-कमल की सेवा मैंने एक पल के लिए भी नहीं की। तो फिर मेरी यह इच्छा कैसे पूर्ण होगी?

कृष्णदास कविराज रसिक भकत-माझ जे रचिल चैतन्य-चरित गौर-गोविन्द-लीला शुनिले गलये शिला ना डूविल ताहे मोर चित
अर्थ

भक्तों में कृष्णदास कविराज रस के बड़े रसिक हैं, जिन्होंने चैतन्य-चरित लिखा। गौर और गोविन्द की लीला सुनकर पत्थर भी पिघल जाते हैं, फिर भी मेरा मन उसमें नहीं डूबा।

ताँहार भक्तेर-सङ्ग ताँर सङ्गे याँर सङ्ग तार सङ्गे केन नाइल बास कि मोर दूःखेर कथा जनम गोँआइनू वृथा धिक् धिक् नरोत्तम दास
अर्थ

उन महापुरुषों के साथ रहने वाले भक्तों की संगति भी मैंने कभी नहीं की। मेरी यह कैसी दुःखभरी कथा है। मैंने अपना जीवन व्यर्थ बिता दिया। धिक्, धिक् इस नरोत्तम दास को!