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हरिम् अभिसर सुन्दरि सितवेशा

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

हरिम् अभिसर सुन्दरि सितवेशा राका-रजनिर् अजनि गुरुर् एषा ध्रुव
अर्थ

हे सुन्दरी, श्वेत वस्त्र धारण कर हरि से मिलने चली जा, क्योंकि पूर्णचन्द्र-सी उजली यह रात्रि अब गहरी और भारी हो चली है।

त्वं कुच-वल्गित-मौक्तिक-माला स्मित-सान्द्री-कृत-शशि-कर-जाला
अर्थ

तेरे वक्षस्थल पर मोतियों की माला झूल रही है, तेरी मुसकान चन्द्रमा की किरणों के जाल को और भी सघन बना देती है।

परिहित-माहिष-दधि-रुचि-सिचया वपुर् अर्पित-घन-चन्दन-निचया
अर्थ

तूने भैंस के दूध से बने दही जैसा चमकीला वस्त्र पहना है, तेरे शरीर पर चन्दन के लेप की मोटी परत लगी है।

कर्ण-करम्बित-कैरव-हासा कलित-सनातन-सङ्ग-विलासा
अर्थ

तेरे कान में खोंसा श्वेत कुमुद मुसकरा रहा है, तूने अपने प्रियतम के साथ मिलन के नित्य आनन्द को अंगीकार कर लिया है।