हरिम् अभिसर सुन्दरि सितवेशा
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
हे सुन्दरी, श्वेत वस्त्र धारण कर हरि से मिलने चली जा, क्योंकि पूर्णचन्द्र-सी उजली यह रात्रि अब गहरी और भारी हो चली है।
तेरे वक्षस्थल पर मोतियों की माला झूल रही है, तेरी मुसकान चन्द्रमा की किरणों के जाल को और भी सघन बना देती है।
तूने भैंस के दूध से बने दही जैसा चमकीला वस्त्र पहना है, तेरे शरीर पर चन्दन के लेप की मोटी परत लगी है।
तेरे कान में खोंसा श्वेत कुमुद मुसकरा रहा है, तूने अपने प्रियतम के साथ मिलन के नित्य आनन्द को अंगीकार कर लिया है।