Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

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कलि-कुक्कुर्-कदन् जदि चाओ (हे) कलि-युग-पावन, कलि-भोय-नाशन, श्री-शची-नन्दन गाओ (हे)
अर्थ

यदि तुम कलियुग रूपी कुत्ते की पीड़ा से मुक्त होना चाहते हो, तो माता शची के सुन्दर पुत्र (शची-नन्दन) का गुणगान करो। वे कलियुग के उद्धारकर्ता हैं (कलियुग-पावन), और वे इस कलह के युग से उत्पन्न सभी भय के नाशक हैं (कलि-भय-नाशन)।

गदाधर्-मादन, निता'येर् प्राण-धन, अद्वैतेर् प्रपूजित गोरा निमाञि बिश्वम्भर्, श्रीनिवास्-ईश्वर्, भक्त-समूह-चित-चोरा
अर्थ

चैतन्य महाप्रभु गदाधर पण्डित को अपने प्रेम से उन्मत्त करते हैं (गदाधर-मादन), और वे नित्यानन्द प्रभु के प्राणों के धन हैं (नित्यानन्द-प्राणधन)। यह गौरवर्ण भगवान गौर श्री अद्वैत आचार्य के सबसे पूज्य आराध्य हैं (अद्वैत-प्रपूजित)। नीम के वृक्ष के नीचे जन्म के कारण माता द्वारा उन्हें प्रेम से निमाई कहा जाता है, और उनके नाना ने उनका नाम विश्वम्भर (विश्व के धारक) रखा है। वे श्रीवास पण्डित के एकमात्र स्वामी हैं (श्रीनिवास-ईश्वर), और वे समस्त उपस्थित भक्तों के हृदय चुरा लेते हैं (भक्त-समूह-चित्त-चोर)।

नदीया-शशधर्, मायापुर्-ईश्वर्, नाम-प्रवर्तन सुर गृहि-जन-शिक्षक, न्यासि-कुल-नायक, माधव राधा-भाव-पूर
अर्थ

चैतन्य नदिया नगर के चन्द्रमा हैं (नदिया-शशधर), श्री मायापुर-धाम के स्वामी हैं (मायापुर-ईश्वर), और अपने ही नाम के प्रवर्तक हैं (नाम-प्रवर्तन)। वे साधु-स्वभाव हैं (सुर), और गृहस्थों के शिक्षक हैं (गृहि-जन-शिक्षक)। वे संन्यासियों के नायक हैं (न्यासी-कुल-नायक)। वे लक्ष्मी के पति हैं (माधव), और श्रीमती राधारानी के भाव से पूर्ण हैं (राधा-भाव-पूर)।

सार्वभौम-शोधन, गजपति-तारण, रामानन्द-पोषण वीर रूपानन्द-वर्धन, सनातन-पालन, हरिदास्-मोदन धीर
अर्थ

चैतन्य सार्वभौम भट्टाचार्य के शोधक और सुधारक हैं (सार्वभौम-शोधन), राजा प्रतापरुद्र (गजपति) के उद्धारक हैं (गजपति-तारण), और श्रील रामानन्द राय के पोषक हैं (रामानन्द-पोषण)। वे महावीर हैं (वीर)। वे श्रील रूप गोस्वामी के आनन्द को बढ़ाते हैं (रूपानन्द-वर्धन), श्रील सनातन गोस्वामी का पालन-रक्षण करते हैं (सनातन-पालन), और हरिदास ठाकुर को आनन्दित करते हैं (हरिदास-मोदन)। वे अत्यन्त गम्भीर हैं (धीर)।

ब्रज-रस भावन, दुष्ट-मत-शातन, कपटी विघातन काम शुद्ध-भक्त-पालन, शुष्क-ज्ञान ताडन, छल-भक्ति-दुषण राम
अर्थ

चैतन्य व्रज-धाम के दिव्य रस का ध्यान करते हैं (व्रज-रस-भावन)। वे समस्त दुष्ट मतों के नाशक हैं (दुष्ट-मत-शातन), और वे कपटी, पाखण्डी भक्तों की छल-वृत्ति को कुचल देते हैं (कपटी-विघातन)। वे कामदेव के समान सुन्दर हैं (काम)। वे अपने शुद्ध भक्तों का पालन-रक्षण करते हैं (शुद्ध-भक्त-पालन), और शुष्क ज्ञान-चर्चा की निन्दा करते हैं (शुष्क-ज्ञान-ताड़न)। वे पाखण्डी और कपटपूर्ण भक्ति को तोड़ देते हैं (छल-भक्ति-दूषण), और वे आनन्द के आकर हैं (राम)।

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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।