Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
1 टेक
लीला-कारी जगन्नाथ चलिते चलिते येये अर्ध-पथे रथ थामे अकस्मात्
अर्थ

श्री जगन्नाथ लीलामय हैं। चलते-चलते उनका रथ आधा मार्ग तय होते ही अचानक रुक जाता है।

सुरासुर नरे टानिल रथेरे तबु ना चलये रथ परिछा पूजारि बेत्र हस्ते करि गालि पाडे कत मत
अर्थ

देवता, दैत्य और मनुष्य सब खींचते हैं, परन्तु रथ नहीं हिलता। हाथ में बेंत लिए परीछा और पुजारी तरह-तरह की गालियाँ देते हैं।

राजार आदेशे जोडे दु-इ पाशे शत शत करि-बर तने रथ बले तथापि ना चले एक पद रथ-बर
अर्थ

राजा के आदेश से दोनों ओर सैकड़ों-सैकड़ों हाथी जोत दिए जाते हैं। हाथी अपनी पूरी शक्ति से खींचते हैं, परन्तु रथ एक कदम भी नहीं हिलता।

तबे गोर-राय रथ पाछे याय शिरेते ठेलिछे रथ बायुर बेगेते निमेष माझेते चलिल योजन शत
अर्थ

पीछे जाकर श्री गौर राय अपना सिर रथ से लगाकर उसे धकेलते हैं। रथ तुरन्त हवा की गति से चल पड़ता है। पल भर में ऐसा लगता है मानो वह आठ सौ मील चला गया हो।

जय गौर बलि दु-इ बाहु तुलि करे रोल यात्रि-गण दुंहार प्रभाबे करि अनुभब यदुर बिस्मित मन
अर्थ

रथयात्रा के भक्तजन दोनों बाहें उठाकर पुकारते हैं, "जय गौर!" श्री जगन्नाथ और श्री गौर दोनों की दिव्य शक्ति को अपनी आँखों से देखकर यह यदु दास आश्चर्य से चकित हो जाता है।