Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

नाचत गौर निखिल नट पण्डित निरुपम भङ्गी मदन मद हर इ

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नाचत गौर निखिल नट-पण्डित निरुपम भङ्गी मदन-मद हर-इ प्रचुर चण्डकर-दरपरि-भञ्जन, अङ्ग-किरणे दिग-बिदिग उजर-इ
अर्थ

नृत्य के परम विद्वान पण्डित भगवान गौर अपनी अनुपम भाव-भंगिमाओं से नृत्य करते हैं, जो कामदेव के गर्व को हर लेती हैं। भगवान गौर के अंगों की कान्ति, जो सूर्य के गर्व को भी चूर कर देती है, समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर देती है।

उनमत अतुल सिंह जिनि गरजन, शुन-इ बली कलि-बारण डर-इ घन घन लम्फ ललित अति चञ्चल, चरण-घाते क्षिति टलमल कर-इ
अर्थ

उनकी गर्जना क्रोधित सिंहों को भी परास्त कर देती है। उस गर्जना को सुनकर बलवान कलियुग भय से स्तब्ध हो जाता है। अपने अधीर नृत्य में वे बार बार उछलते हैं। उनके चरणों के भार से पृथ्वी कांप उठती है।

किन्नर गरब खरब करु परिकर, गाय उलसे अमिय रब झर-इ बायत बहु-बिध खोल खमक धुनि, परशत गगन कौन धृति धर-इ
अर्थ

उनके सहचर आनंद से अमृत-सम गीत गाते हैं, ऐसे गीत जो किन्नरों के गर्व को छोटा कर देते हैं। खोल और खमक ढोल अनेक प्रकार से मधुर स्वर में बजते हैं। उनकी मधुर ध्वनि आकाश को स्पर्श करती है। ऐसे में कौन शांत और अविचल रह सकता है?

अतुल प्रताप काम्पि दुरजन-गण, लेय-इ शरण चरण-तले पड-इ नरहरि पहुङ्क कीरिति रहु जग-भर, परम दुलह धन नियत बितर-इ
अर्थ

डर से काँपते हुए बलवान दुर्जन भगवान् गौर के चरणों की शरण लेते हैं। नरहरि के स्वामी कीर्तन की ध्वनि से सारे लोक भर देते हैं। वे सबसे दुर्लभ धन इस संसार को खुले हाथों भेंट में देते हैं।