नाचे गोरा गुण मणि केबल प्रेमेर खनि
सद्गुणों के मणि गौर प्रभु नृत्य करते हैं। वे प्रेम के मणियों से भरी हुई एक खान हैं। उनके चारों ओर उनके प्रिय पार्षद हैं। उनकी शोभा अद्भुत है। वे मानो तारों से घिरे हुए एक सुवर्ण चन्द्रमा हैं।
उनका कोमल रूप शिरीष के फूल को भी हरा देता है। उनके अंगों के रोम पुलकित हो उठते हैं। उनका रूप हर मन को मोहित करता है। वे खिले हुए कमल के गर्व को भी दूर भगा देते हैं। उनका मुसकुराता मुख और अरुण अधर देखकर कामदेव भी स्वयं को तुच्छ और लज्जित अनुभव करता है।
नाचते हुए वे कितनी ही सुन्दर भंगिमाएँ दिखाते हैं! बाहें उठाकर वे 'हरि!' पुकारते हैं। वे लगातार अमृत की भारी वर्षा करते हैं। उनका हृदय करुणा से भरा है। किसी पतित पापी को देखते ही उनके नेत्रों से करुणा के आँसुओं की गंगा उमड़ पड़ती है।
खोल और करताल बज उठते हैं। गौर प्रभु चलते हुए भी सुन्दर ढंग से नृत्य करते हैं। उन्हें देखकर कौन मोहित न होगा? अब सभी आनन्द से उन्मत्त हैं। अब किसी के मन में दुःख और शोक नहीं रहता। परन्तु हाय! नरहरि किसी कारण से उस आनन्द से वंचित रह गए।