Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

नदीया आकाशे सङ्कीर्तन मेघ साजे

नदीया-आकाशे सङ्कीर्तन-मेघ साजे खोल करताल मुखे गभीर गरजे
अर्थ

खोल और करताल की गंभीर गड़गड़ाहट से भरे हुए संकीर्तन के मेघ नदिया के आकाश में छा गए हैं।

हुहुङ्कार बज्र-ध्वनि हय मुहुर्-मुहु बरिखये नाम-नीर घन दु-इ पहुं
अर्थ

बार-बार बादल गरजते हैं और बिजली गिरती है। दो बादल, चैतन्य महाप्रभु और नित्यानन्द प्रभु, पवित्र नामों की भारी वर्षा करते हैं।

नाचे गाय पारिषद थमके थमके भाबेर बिजुली ताय सघन चमके
अर्थ

दोनों प्रभु रुक-रुक कर अपने सखाओं के साथ गान और नृत्य करते हैं। प्रेम की बिजली की चमक सभी को विस्मित कर देती है।

प्रेमेर बादले नैद शान्तिपुर भासे राय अनन्तेर हिया ना भुलिल रसे
अर्थ

प्रेम की भारी वर्षा से बड़ी बाढ़ आ जाती है। सारा शान्तिपुर उस जल में तैरने लगता है। परन्तु हाय! अनन्त राय का हृदय उस उमड़ते अमृत-जल में नहीं बहा।

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पद
4