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प्रेम्से कहो स्रि क्र्स्न चैतन्य

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

प्रेम्से कोहो स्रि क्र्स्न-चैतन्य-नित्यनन्द अद्वैत-गदधर-स्रिवस-पन्दित कि जय! स्रि अन्तर्द्विप मयपुर, सिमन्त, गोद्रुम, मध्यद्विप, कोलद्विप, र्तुद्विप, जह्नुद्विप, मोदद्रुम, रुद्रद्विपत्मक स्रि नवद्विप-धम कि जय! स्रि रध-क्र्स्न-गोप-गोपि-गो-गोवर्धन व्र्न्दवन-रध-कुन्द-यमुनजि कि जय! स्रि तुलसि-देवि कि जय! स्रि गन्गजि कि जय! स्रि सुरभि-कुन्ज कि जय! स्रि नम् हत्त कि जय! स्रि भक्ति-देवि कि जय! स्रि गयक, स्रोत, भक्त-व्र्न्द कि जय!
अर्थ

प्रेम से कहो: श्री कृष्ण चैतन्य-नित्यानन्द-अद्वैत-गदाधर-श्रीवास पण्डित की जय! श्री अन्तर्द्वीप, मायापुर, सीमन्त, गोद्रुम, मध्यद्वीप, कोलद्वीप, ऋतुद्वीप, जह्नुद्वीप, मोदद्रुम और रुद्रद्वीप स्वरूप श्री नवद्वीप-धाम की जय! श्री राधा-कृष्ण, गोप-गोपी, गौ, गोवर्धन, वृन्दावन, राधा-कुण्ड और यमुनाजी की जय! श्री तुलसी देवी की जय! श्री गंगाजी की जय! श्री सुरभि-कुंज की जय! श्री नामहट्ट की जय! श्री भक्ति देवी की जय! श्री गायक, श्रोता और भक्तवृन्द की जय!