रध सखि जल केलिसु
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
जल-क्रीड़ा में निपुण राधा अपने ही कुण्ड में मधु के शत्रु मधुरिपु के साथ क्रीड़ा करती हैं।
जब वे उनके वक्षस्थल के वस्त्र को खींचते हैं तो हलचल मच जाती है; अस्त्र के स्थान पर कमल की डंडी उठा ली जाती है।
कसकर आलिंगन और आग्रहपूर्ण चुम्बनों में प्रबल, किन्तु एक-दूसरे पर शीतल जल छिड़कने में कठोर।
आनन्द के भार से उनका नित्य ओज शिथिल पड़ जाता है, जबकि प्रियतम की पराजय का चिह्न बनी उनकी निर्भीकता और बढ़ती जाती है।