Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

राधा सखि जल केलिषु

राधा सखि जल-केलिषु निपुणा खेलति निज-कुण्डे मधुरिपुणा
अर्थ

जल-क्रीड़ा में निपुण राधा अपने ही कुण्ड में मधु के शत्रु मधुरिपु के साथ क्रीड़ा करती हैं।

कुच-पट-लुण्ठन-निर्मित-कलिना आयुध-पदवी-योजित-नलिना
अर्थ

जब वे उनके वक्षस्थल के वस्त्र को खींचते हैं तो हलचल मच जाती है; अस्त्र के स्थान पर कमल की डंडी उठा ली जाती है।

दृढ-परिरम्भण-चुम्बन-हठिना हिम-जल-सेचन-कर्मणि कठिना
अर्थ

कृष्ण कसकर आलिंगन और चुम्बन में हठी हैं, और राधा उन पर शीतल जल छिड़कने में कठोर हैं।

सुख-भर-शिथिल-सनातन-महसा दयित-पराजय-लक्षण-सहसा
अर्थ

आनन्द के भार से कृष्ण का नित्य ओज ढीला पड़ जाता है, जबकि राधा का साहस, जो प्रियतम की हार का लक्षण है, बढ़ता ही जाता है।

इस भजन के बारे में

पद
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