Nandgram Dham
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रध सखि जल केलिसु

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टेक्स्ट

AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

रध सखि जल-केलिसु निपुन खेलति निज-कुन्दे मधुरिपुन
अर्थ

जल-क्रीड़ा में निपुण राधा अपने ही कुण्ड में मधु के शत्रु मधुरिपु के साथ क्रीड़ा करती हैं।

कुच-पत-लुन्थन-निर्मित-कलिन अयुध-पदवि-योजित-नलिन
अर्थ

जब वे उनके वक्षस्थल के वस्त्र को खींचते हैं तो हलचल मच जाती है; अस्त्र के स्थान पर कमल की डंडी उठा ली जाती है।

द्र्ध-परिरम्भन-चुम्बन-हथिन हिम-जल-सेचन-कर्मनि कथिन
अर्थ

कसकर आलिंगन और आग्रहपूर्ण चुम्बनों में प्रबल, किन्तु एक-दूसरे पर शीतल जल छिड़कने में कठोर।

सुख-भर-सिथिल-सनतन-महस दयित-परजय-लक्सन-सहस
अर्थ

आनन्द के भार से उनका नित्य ओज शिथिल पड़ जाता है, जबकि प्रियतम की पराजय का चिह्न बनी उनकी निर्भीकता और बढ़ती जाती है।