रो इ रो इ जपे गोरा कृष्ण नाम मधु
रोते-रोते श्री गौर जप करते हैं। वे श्री कृष्ण के नाम का अमृत ऐसे चखते हैं जैसे निर्मल दिव्य चन्द्रमा पर अमृत की धाराएँ बहती हों।
शिव और ब्रह्मा भी उनके चरणों की पूजा करने निकट नहीं आ सकते। सब साथियों को छोड़कर वे एकान्त में एक वृक्ष के नीचे बैठ जाते हैं।
वे सब तुच्छ भौतिक सुखों को त्याग देते हैं। भौतिकता का उन पर कोई प्रभाव नहीं है। उनका स्वर्ण-सा शरीर दिव्य प्रेम-भाव के महान खजाने से भरा हुआ है।
उन्हें देखकर सब लोग क्षण-क्षण रोते हैं। अब वासुदेव घोष का हृदय शान्त नहीं रह पाता।