Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

शचीर अङ्गने कभु माधबेन्द्र पुरी प्रभु

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भाइ रे शचीर अङ्गने कभु माधबेन्द्र पुरी प्रभु प्रसादान्न कोरेन भोजन खाइते खाइते ता'र ऐलो प्रेम सु-दुर्बार बोले शुनो सन्न्यासीर गण
अर्थ

हे भाइयों, हे संन्यासियों, सुनो। एक बार माधवेन्द्र पुरी माता शची के आँगन में भगवान् का प्रसाद पा रहे थे। खाते-खाते वे प्रेम के ऐसे वेग से भर गए, जिसे रोका नहीं जा सकता था।

मोचा-घण्ट फुल-बोर्डि डालि डाल्ना चच्चोर्डि शची माता कोरिलो रन्धन त'र शुद्ध भक्ति हेरि' भोजन कोरिलो हरि सुधा-सम ए अन्न-ब्यञ्जन
अर्थ

माता शची ने केले के फूल, दाल के बड़े और मसालेदार चच्चड़ी सब्ज़ी बनाई। उनकी शुद्ध भक्ति देखकर, भगवान कृष्ण ने उनका बनाया हुआ अन्न और सब्ज़ियाँ खाईं, जो अमृत के समान स्वादिष्ट थीं।

जोगे जोगी पाय जाहा भोगे आज ह'बे ताहा हरि बोलि' खओ सबे भाइ कृष्णेर प्रसाद-अन्न त्रि-जगत कोरे धन्य त्रिपुरारि नाचे जाहा पाइ
अर्थ

जो योगी योग-साधना से पाते हैं, वह आज खाने से ही मिल जाएगा। हे मेरे भाइयों, "हरि!" कहकर सब मिलकर कृष्ण-प्रसाद पाओ। कृष्ण का प्रसाद तीनों लोकों को धन्य कर देता है; इसे पाकर भगवान् शिव भी नाचते हैं।