Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
सहचर-अङ्गे गोरा अङ्ग हेल-इया चलिते ना पारे खेने पडे मूरछिया
अर्थ

किसी साथी के अंग का सहारा लेकर श्री गौर चल नहीं सकते। अगले ही क्षण वे मूर्च्छित हो जाते हैं।

अति दुरबल देह धरणे ना याय क्षिति-तले पडे सहचर मुख चाय
अर्थ

वे अत्यन्त दुर्बल हैं। वे चल नहीं सकते। अगले ही क्षण वे भूमि पर गिर पड़ते हैं। उनके साथी उनके मुख की ओर देखते रहते हैं।

कोथाय पराण-नाथ बलि खेने कान्दे पूरब बिरह ज्वरे थिर नाहि बान्धे
अर्थ

अगले ही क्षण "मेरे प्राणनाथ कहाँ हैं?" कहकर वे रो पड़ते हैं। विरह की ज्वाला उनके भीतर जलती है। उन्हें शान्ति नहीं मिलती।

केने हेन हैल गोरा बुझिते ना पारि ज्ञण दास कहे निछनि लैया मरि
अर्थ

श्री गौर ऐसे क्यों हो गए हैं? मुझे नहीं पता। ज्ञान दास कहते हैं, इन लीलाओं को देखकर मैं अभिभूत हो जाता हूँ।