Vaishnava Songs
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“गोविन्द” के परिणाम

219 भजन · 261 पद भजन के शब्दों में

2 पद भजन में 2

श्री चैतन्य महाप्रभु

  • पद 6भजन
    श्री-राम गोविन्द मुकुन्द शौरे
    श्री-कृष्ण नारायण वासुदेव
    इत्य् आदि-नामामृत-पान-मत्त
    भृङ्गाधिपायाखिल-दुःख-हन्त्रे
  • पद 8भजन
    श्री-गौरी-नेत्रोत्सव-मङ्गलाय
    तत्-प्राण-नाथाय रस-प्रदाय
    सदा समुत्कण्ठ-गोविन्द-लीला
    गान-प्रवीणाय नमो’स्तु तुभ्यम्
2 पद भजन में 1

वृन्दावन दास ठाकुर

  • पद 2भजन
    पुण्यवन्त श्रीवास-अङ्गने शुभारम्भ
    उठिल कीर्तन-ध्वनि ‘गोपाल’ ‘गोविन्द’
  • पद 7भजन
    लैया गोविन्द घोष आर कत-जन
    गौरचन्द्र-नृत्ये सबे करेन कीर्तन
1 पद भजन में 3

वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    दीव्यद्-वृन्दारण्य-कल्प-द्रुमाधः
    श्रीमद्-रत्नागार-सिंहासन-स्थौ
    श्रीमद्-राधा-श्रील-गोविन्द-देवौ
    प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि
1 पद भजन में 3

भक्तिविनोद ठाकुर

  • पद 2भजन
    गोविन्द विग्रह धरि’, तथाय आछेन हरि,
    नयने वङ्किम-दृष्टि, मुखे मन्द-हास
    किवा त्रि-भङ्गम ठाम, वर्ण समुज्ज्वल श्याम,
    नव-किशलय शोभा श्री अङ्गे प्रकाश
2 पद भजन में

रूप गोस्वामी

  • पद 27भजन
    वयं हन्त गोविन्द सौन्दर्यवन्तं
    नमस्कुर्महे शर्म-हेतोर् भवन्तम्
    त्वयि स्पष्ट-निष्ठ्यूत-भूयश्-चिद्-इन्दुं
    मुदा नः प्रसादी-कुरु प्रेम-बिन्दुम्
  • पद 28भजन
    क्षुभ्यद्-दम्भोलि-जृम्भोत्तरल-घन-घटारम्भ-गम्भीर-कर्मा
    निस्तम्भो जम्भवैरी गिरि-धृति-चटुलाद् विक्रमाद् येन चक्रे
    तन्वा निन्दन्तम् इन्दीवर-दल-वलभी-नन्दद्-इन्दीन्दराभां
    तम्- गोविन्दाद्य नन्दालय-शशि-वदनानन्द वन्देमहि त्वाम्
2 पद भजन में

गौर किशोर दास बाबाजी

  • पद 9भजन
    (गोसाइ) छापान्न दण्ड रात्रि-दिने
    जाने ना राधा-गोविन्द विने, राधे राधे
  • पद 10भजन
    तार पर चारि दण्ड शुति' थाके
    स्वप्ने राधा-गोविन्द देखे, राधे राधे
2 पद भजन में

रघुनाथ दास गोस्वामी

  • पद 2भजन
    यस्याः कान्त-तनूल्लसत्-परिमलेनाकृष्ट उच्चैः स्फुरद्-
    गोपी-वृन्द-मुखारविन्द-मधु तत् प्रीत्या धयन्न् अप्य् अदः
    मुञ्चन् वर्त्मनि बम्भ्रमीति मदतो गोविन्द-भृङ्गः सतां
    वृन्दारण्य-वरेण्य-कल्प-लतिकां राधां कदाहं भजे
  • पद 8भजन
    उल्लासैर् जल-केलि-लोलुप-मनः-पूरे निदाघोद्गमे
    क्ष्वेलि-लम्पट-मानसाभिर् अभितः सायं सखीभिर् वृताम्
    गोविन्दं सरसि प्रिये 'त्र सलिल-क्रीडा-विदग्धं कणैः
    सिञ्चन्तीं जलयन्त्रकेन पयसां राधां कदाहं भजे
2 पद भजन में

नरोत्तम दास ठाकुर

  • पद 8भजन
    गोविन्द शरीर सत्य, ताहार सेवक नित्य,
    वृन्दावन भूमि तेजोमय
    त्रिभुवने शोभा सार, हेनो स्थान नाहि आर,
    याहार स्मरणे प्रेम होय
  • पद 9भजन
    शीतल किरण कोर, कल्पतरु गुणधर
    तरु लता छाया ऋतु सेवा
    गोविन्द आनन्दमय, निकटे वनिता-चय
    मधुर विहार अति शोभा
1 पद भजन में 1

आदि शंकराचार्य

  • पद 4भजन
    कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण
    श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे
    अछ्युतानन्त हे माधवाधोक्षज
    द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक
1 पद भजन में 1

व्यासदेव · और भजन

  • पद 9भजन
    मां केशवो गदया प्रातर् अव्याद्
    गोविन्द आसङ्गवम् आत्त-वेणुः
    नारायणः प्राह्ण उदात्त-शक्तिर्
    मध्यन्-दिने विष्णुर् अरीन्द्र-पाणिः
1 पद भजन में 1

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    …श्री-केशवाच्युत मुकुन्द रथाङ्ग-पाणे
    गोविन्द माधव जनार्दन दानवारे
    नारायणामर-पते त्रि-जगन्-निवास
    जिह्वे जपेति सततं मधुराक्षराणि