- पद 3भजनअतिहि सु-मधुर बचने सु-निपुण परितोष कर-इ सभाय
चलल निज निज गेहे सबे मिलि गौर-हरि यश गाय
“गौर आरती” के परिणाम
439 भजन · 566 पद भजन के शब्दों में · 472 पद अर्थ में
इनमें से कोई भी शब्द वाले भजन, सारे शब्दों वाले पहले। केवल सारे शब्दों वाले भजन
1 पद भजन में
1 पद भजन में
- पद 4भजननरहरि दास भणे जीबेर कपाल गुणे
ह-इल गौराङ्ग अबतार
बिना-मूले गोरा-धन यदि कर अकिञ्चन
आय निता-इर प्रेमेर बाजार
1 पद भजन में
- पद 1भजनजय कृष्ण चैतन्य नित्यानन्द चन्द्र
अद्वैत आचार्य जय गौर-भक्त-वृन्द
1 पद भजन में
- पद 4भजनभब-तरिबारे हरि-नम-मन्त्र भेल करि
आपनि गौराङ्ग करे पार
भबे ये दु\बिया मारे केब उद्धारिबे तारे
परमानन्देर परिहार
1 पद भजन में
- पद 1भजनगोरा दयार अबधि गुण-निधि
सुरधुनी-तीरे नदीया-नगरे
गौराङ्ग बिहरे निरबधि
1 पद भजन में
- पद 1भजनफाल्गुन-पूर्णिमा निशि शची-अङ्काकासे आसि
गौरचन्द्र ह-इल उदय
से शशीर सहचर भक्त-तारका-निकर
चारि-दिके प्रकाशित हय
1 पद भजन में
- पद 3भजनउत्तम अधम किछु ना बाछिल
याचिया दिलेक कोल
कहे प्रेमानन्द एमन गौराङ्ग
अन्तरे धरिया दोल
1 पद भजन में
- पद 2भजनहेर देख अपरूप गौर-किशोर
कैछन भाब नहत किछु ओर
1 पद भजन में
- पद 1भजनकीर्तन रसमय आगम अगोचर
केबल आनन्द-कन्द
अखिल लोक-गति भकत-प्राण-पति
जय गौर नित्यानन्द चन्द
1 पद भजन में
- पद 3भजनजय अद्वैतचन्द्र भक्तेर जीबन
आनिलेन गौरचन्द्र करि आकर्षण
1 पद भजन में
- पद 4भजनदेखिया आनन्द कन्द भक्त-गणेर आनन्द
मने जाने ह-इबे निस्तार
गौराङ्ग नहिल रति सङ्कर्षण मन्द-मति
दया कर शचीर कुमार
1 पद भजन में
- पद 1भजनजगन्नाथ मिश्रेर सुकृति बीज हैते
जनमिल गौर-कल्प-तरु नदीयाते
1 पद भजन में
- पद 3भजनजीबेरे करिया यन्त्र हरि-नाम महा-मन्त्र
हाते हाते प्रेमेर अँजलि
अधम दुःखित यत तार हैले भागबत
बाढिल गौराङ्ग-ठाकुराली
1 पद भजन में
- पद 6भजनबासुदेब घोष कहे मने करि आश
गौर-पद-द्वन्द्व हृदे करिया भरसा
1 पद भजन में
- पद 5भजनजय रे गौराङ्ग जय अद्वैत निता-इ
बलि भक्त-गण आसे करि धा-ओयाधा-इ
1 पद भजन में
- पद 2भजनपेखलु गौर-किशोर
नट नायर हेरा-इते आनन्द ओर
भाबे भोर तनु अन्तर गर गर
कण्ठे गद गद बोल
1 पद भजन में
- पद 3भजनजय श्री-गौरसुन्दर करुँआर सिन्धु-मय
जय बृन्दाबन-राय रे
नबद्वीपे पुरन्दर बृन्दाबन पामरे
चरँअ-कमले देह छाय रे
1 पद भजन में
- पद 2भजनअरे मोर गौराङ्ग सुन्दर राय
भकत हृदय कुमुद परकाशल अकिञ्चन जीबेर उपाय
1 पद भजन में
- पद 1भजनप्रिय स्वप्ने दृष्टा सरिदिन-सुतेवात्र पुलिनं
यथा वृन्दारण्ये नटन-पटवस् तत्र बहवः
मृदङ्गाद्यं वाद्यं विविधम् इह कश्चिद् द्विज-मणिः
स विद्युद्-गौराङ्गः क्षिपति जगतीं प्रेम-जलधौ
1 पद भजन में
- पद 3भजनचलन सुन्दर मत्त करिबर
नूपुर झङ्कृत करिया
भाबे अबश नाहि दिग पाश
गौर बलि हुङ्कारिया